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भारतीय रेलवे की हरित ऊर्जा पहल

भारतीय रेल पर ऊर्जा संरक्षण

  • भूमिका

    • भारत के माननीय प्रधान मंत्री श्री नरेंद्र मोदी जी ने 25 दिसंबर,2014 को अपने वक्तव्य में कहा कि-

      “रेल और डाक विभाग, संभवतः यही दोनों ऐसे संगठन हैं जिनका नेटवर्क काफी विस्तृत है और यदि इनका उपयोग बुद्धिमत्तापूर्वक किया जाए तो ये देश के आंतरिक (सुदूरवर्ती) क्षेत्रों में पर्याप्त सुधार करने में कारगर सिद्ध हो सकते हैं। रेलें हमेशा से ही देश के परिवहन का माध्यम रही हैं और अब हम इसे देश के आर्थिक विकास के मेरूदंड के रूप में देखना चाहते हैं।“

      भारतीय रेल एक महत्वपूर्ण राष्ट्रीय परिसंपत्ति है। यह एकल परिवहन नेटवर्क है जो देश के दूर-दराज इलाकों को एक दूसरे से जोड़ता है। यह विश्व के सबसे बड़े परिवहन और संभारतंत्र(लॉजिस्टिक्स) में से एक है जिसमें 19,000 गाड़ियों,यात्रियों और माल का संचालन एकसाथ होता है। प्रतिदिन 12,000 गाड़ियां इस उप महाद्वीप पर फैले लगभग 8,500 स्टेशनों को एक दूसरे से जोड़ते हुए 23 मिलियन यात्रियों को ढोती हैं जो कि आस्ट्रेलिया की पूरी जनसंख्या के बराबर है। प्रतिदिन 7,000 से अधिक मालगाड़ियों द्वारा लगभग 3 मिलियन टन माल ढोया जाता है। इसका 65,000 रूट किमी मार्ग का नेटवर्क है जो पृथ्वी की परिधि के 1.5 गुने से ज्यादा है। 2012-13 में 1008.09 मिलियन टन के आरंभिक मालभाड़ा लदान करके यह चीन, रूस और यूनाइटेड स्टेट्स जैसे अन्य देशों सहित एक बिलियन टन से अधिक माल ढोने वाली चुनिंदा देशों के क्लब में शामिल हो गई है। 2014-15 में, भारतीय रेल द्वारा 1.1 बिलियन टन से अधिक माल ढुलाई की अपेक्षा की जाती है ।

  • पृष्ठभूमि

    • वैश्विक स्तर पर, वैश्विक ऊर्जा उपयोग के 27.6 % की खपत परिवहन सेक्टर में होती है, जहां तरल ईंधन प्रमुख स्रोत है। विश्व की तरल ईंधन(liquid fuel) की कुल खपत का 50 प्रतिशत सीधे परिवहन के खाते में दर्ज है और 2035 तक यह हिस्सेदारी बढ़कर 60% तक होने की संभावना है। परिवहन सेक्टर में ऊर्जा खपत और उससे होने वाला कार्बन उत्सर्जन मुख्यतः सड़क और उसके बाद उड्डयन और नौपरिवहन से होता है। इस ऊर्जा की 2.2% खपत रेल सेक्टर द्वारा की जाती है जिसका अर्थ यह है कि विश्व की ऊर्जा की 0.6% खपत रेलवे द्वारा की जाती है। इस ऊर्जा खपत को, कर्षण शक्ति के लिए (गाड़ियों को पावर देने हेतु) और गैर-कर्षण के लिए( मुख्यतः भवनों में उपयोग के लिए) में वर्गीकृत किया गया है। इसके अतिरिक्त, रेल को परिवहन का सुरक्षित, ऊर्जा संरक्षित और न्यूनतम कार्बन उत्सर्जक माध्यम माना जाता हैं और ये न केवल किसी देश की आर्थिक प्रगति में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती हैं बल्कि इन्हें उत्तरोत्तर एक ऐसे अहम किरदार के रूप देखा जा रहा है जो अपनी क्षमता और संसाधनों को विकसित करते हुए,नई प्रौद्योगिकी को अपनाते हुए, अधिकतम विद्युतीकरण करते हुए, परिवहन के अन्य यातायात साधनों से यात्रियों को अपनी तरफ अधिक आकर्षित करते हुए कम कार्बन उत्सर्जन करने और संपोषित समाज तैयार करने में सहायक है।

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      सन् 1975 से विश्व में रेल द्वारा वहन की गई यात्री किमी(दूरी) की मात्रा में 130% की वृद्धि हुई है। इस क्षेत्र में भारत का महत्वपूर्ण योगदान है। बढ़ते हुए रेल यातायात की आवश्यकताओं को पूरा करने के लिए रेल में ऊर्जा की मांग बढ़ रही है। अतः रेल परिवहन में ऊर्जा संरक्षण उपायों को क्रियान्वित करते हुए रेल यातायात में बढ़ते विकास के साथ सतत रेल परिवहन को प्राप्त करना विभिन्न देशों का मुख्य उद्देश्य है।

      भारतीय रेल(आईआर) विश्व का सबसे लंबा नेटवर्क है जिसमें 65,436 किमी(40,660 मील) मार्ग पर 115,000 किमी(71,000मील) रेलपथ और 8,495 स्टेशन हैं। 2014-15 में भारतीय रेल द्वारा 8.397 अरब यात्रियों अर्थात् 1050 मिलियन टन माल के अतिरिक्त 23 मिलियन यात्रियों का प्रतिदिन वहन किया गया। सन् 2015 तक भारतीय रेल पर 26,000 किमी रेलपथ का विद्युतीकरण किया गया जो कि कुल रेलवे नेटवर्क का लगभग 40% है।

      “भारतीय रेल विजन दस्तावेज़-2020” के अनुसार भारतीय रेल की योजना वर्तमान रेलपथ के 33,000 किमी मार्ग के विद्युतीकरण के संचयी लक्ष्य को प्राप्त करना है। इससे यह प्रदर्शित होता है कि आगामी वर्षों में भारतीय रेल पर ऊर्जा खपत काफी हद तक बढ़ने की संभावना है।

      हाल ही में, भारतीय रेल ने पारंपरिक ऊर्जा स्रोतों पर अपनी निर्भरता कम करते हुए ऊर्जा संरक्षण उपायों को क्रियान्वित करने का प्रयास किया है जो कि उनकी तेजी से बढ़ती हुई मांगों को देखते हुए मंहगी पड़ रही हैं जबकि उनके स्रोत सीमित हैं अथवा नष्ट हो चुके हैं और जीएचजी उत्सर्जन को कम किया जाना है। भले ही, रेल परिवहन के अन्य साधनों की अपेक्षा अधिक ऊर्जा संरक्षित है किंतु भारतीय रेल के लिए ऊर्जा संरक्षण का संवर्धन एक महत्वपूर्ण मुद्दा है जिससे जलवायु परिवर्तन में उसकी भागीदारी कम रहे किंतु साथ-साथ प्रतिस्पर्धात्मक लाभ को बचाया और बढ़ाया जा सके ।

  • ऊर्जा क्षेत्र में भारतीय रेलवे के परिप्रेक्ष्य

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      देश की कुल ऊर्जा खपत का लगभग 1.8 प्रतिशत भारतीय रेल के खाते में दर्ज है। (2014-15 में भारतीय रेल द्वारा 17.5 बिलियन किलोवाट घंटे से अधिक विद्युत खपत हुई।) पिछले कुछ वर्षों में भारतीय रेल में विद्युत खपत बढ़ी है। वर्ष 2009-14 के दौरान ट्रैक्शन के लिए इसमें 20% की वृद्धि हुई जबकि नॉन-ट्रैक्शन के लिए केवल 0.16% की वृद्धि हुई। भारतीय रेल ने एक दीर्घावधि ऊर्जा संरक्षण एवं संरक्षण कार्यक्रम (ईईसीपी)(2010-2032) शुरू किया है। कार्यक्रम का उद्देश्य रेल व्यवस्था में उत्तरोत्तर कई ऊर्जा संरक्षण तकनीकों और उपायों को आरंभ करना है। भारतीय रेल ऊर्जा संरक्षण में आगे बढ़ रहा है और इसके आपेक्षिक विद्युत खपत में साल दर साल ट्रैक्शन और नॉन-ट्रैक्शन दोनों क्षेत्रों में लगभग 0.3% की दर से कमी आई है। हालांकि, उपलब्ध ऊर्जा संरक्षण के अवसरों और आगामी विस्तार पर गौर किया जाए तो ऐसा लगता है कि नवीनतम ऊर्जा संरक्षण तकनीक, समाधान और श्रेष्ठ अंतर्राष्ट्रीय कार्य प्रणालियों को अपनाकर इसमें सुधार की संभावनाएं बढ़ाई जा सकती है।

      ऊर्जा संरक्षण के दीर्घकालीन दृष्टिकोण को ध्यान में रखते हुए भारतीय रेल द्वारा पहले से ही कुछ कार्य प्रारंभ किए गए हैं–

      • विद्युत लोकोमोटिव और इलेक्ट्रिकल मल्टीपल यूनिट(ईएमयू) के लिए थ्री फेज़ ऊर्जा संरक्षित तकनीकों को अपनाना.
      • नॉन-ट्रैक्शन प्रयोग जैसे-एलईडी लाइटों को अपनाना, केवल स्टार रेटेड विद्युत उपकरणों का प्रयोग आदि जैसे ऊर्जा संरक्षित उपायों का आरंभ किया जाना।

      भारतीय रेल में 2007-08 से 2013-14 के बीच ट्रैक्शन ऐप्लीकेशन में विद्युत खपत में औसत वृद्धि लगभग 20% थी और इस अवधि में विद्युत लागत में वृद्धि 50% रही। इसी अवधि में माल ढुलाई में 41% और यात्री यातायात में 36% तक वृद्धि दर्ज की गई।

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      इसका तात्पर्य यह है कि लगभग 20% अतिरिक्त ऊर्जा से 41%माल ढुलाई वृद्धि को प्राप्त कर लिया गया। यह भारतीय रेल पर सिर्फ ऊर्जा संरक्षण लोकोमोटिव को लाने के कारण संभव हो सका। उसी अवधि में ,यह एसईसी में 17.6 प्रतिशत सुधार के कारण संभव हुआ है।

      2009-2010 से 2013-2014 तक पांच वर्षों के लिए विद्युत के लिए आपेक्षिक ऊर्जा खपत (किलोवाटघंटे/000कुल टनकिमी में)

      क्रमांक वर्ष विशेष खपत Energy
      यात्री कमी(प्रतिशत में) माल कमी(प्रतिशत में)
      1 2009-10 19.6 7.29
      2 2010-11 19.4 1.02 6.79 6.85
      3 2011-12 19.0 2.06 6.43 5.30
      4 2012-13 18.9 0.52 6.13 4.66
      5 2013-14 18.9 0 6.00 2.12
      पांच वर्षों का औसत आईएमपी/डीईटी 3.57 17.6

  • भारतीय रेल पर ऊर्जा परिदृश्य

    • विद्युत खपत प्रचलन- ट्रैक्शन और नॉन-ट्रैक्शन

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      ट्रैक्शन बनाम नॉन-ट्रैक्शन पावर शेयर

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      औसत पावर लागत

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  • भारतीय रेल में ऊर्जा प्रबंधन

    • वर्ष 2014-15 में कुल विद्युत ऊर्जा बिल लगभग 11000 करोड़ और डीजल बिल लगभग 18000 करोड़ था। आधुनिकतम ऊर्जा संरक्षण तकनीक को अपनाते हुए भारतीय रेल निरंतर ऊर्जा उपयोग को बेहतर बनाने के लिए कार्य करता रही है। राष्ट्रीय स्तर पर इन प्रयासों को बराबर सराहना मिलती रही है क्योंकि गत कई वर्षों से इसके कई अधिष्ठानों को प्रतिष्ठित राष्ट्रीय ऊर्जा संरक्षण पुरस्कार प्राप्त हुए हैं। लगातार कई वर्षों से इसे सर्वाधिक बार बीईई पुरस्कार प्राप्त करने का गौरव हासिल है। पिछले 5 वर्षों में 64 ऊर्जा संरक्षण पुरस्कार इसके हिस्से में आएं हैं। थ्री फेज़ विद्युत लोकोमोटिव तकनीक, ट्रैक्शन सब स्टेशन टीएसएस पर पावर फैक्टर करेक्शन कैपेसिटर का प्रयोग, टी5 लाइटिंग का प्रयोग,उच्च क्षमतायुक्त पंप,3* एवं उससे अधिक रेटिंग वाले उपकरण जैसे उपाय और अन्य बहुत से ऊर्जा संरक्षण उपायों के परिणामस्वरूप पिछले 5 वर्षों में इसके विद्युत बिल में लगभग 2500 करोड़ की कुल बचत की गई। एक आकलन के अनुसार, रेलवे ने इसके ट्रैक्शन और नॉन-ट्रैक्शन ऊर्जा प्रयोग में इन साधनों के माध्यम से विद्युत ऊर्जा के 400 एम यूनिट से अधिक की बचत की। भारतीय रेल द्वारा अपनाए गए इन उपायों के परिणामस्वरूप आनुषंगिक(connected) लदान में 5% की वृद्धि के बावजूद नॉन-ट्रैक्शन ऐप्लीकेशन के लिए बिजली की भारी बचत की गई । इसके अतिरिक्त, भारतीय रेल ने अगले 5 वर्षों के लिए 10-15% की बचत की महत्वाकांक्षी योजना की रूपरेखा तैयार कर ली है।

      भारतीय रेल में बेहतर ऊर्जा उपयोग हेतु पहल:

      i. ऊर्जा संबंधी लेखा परीक्षा (एनर्जी ऑडिट)

      पूरे विश्व में ऐसा माना जाता है कि ऊर्जा बचत के लिए उपलब्ध आधुनिकतम तकनीकी समाधान की सहायता से विभिन्न ऊर्जा खपत केंद्रों की निरंतर लेखा परीक्षा करने से ऊर्जा बचत के संभावित क्षेत्रों का पता चलता है और इन क्षेत्रों के आरंभिक(एबीसी) विश्लेषण करने के पश्चात, निवेश योजना की जाती है। तदनुसार, सभी क्षेत्रीय रेलों और उत्पादन इकाइयों को 100 किलोवाट से अधिक बिजली ऊर्जा की खपत करने वाले केंद्रों का ताजा सर्वेक्षण कराने और ऊर्जा बचत वाले संभावित क्षेत्रों को ढूंढ़ने के निर्देश दिए गए हैं। रेलवे को आंतरिक और वाह्य दोनों साधनों (अपने अधिकारियों और कर्मचारियों दोनों का उपयोग करते हुए) का प्रयोग करते हुए ऐसी यूनिटों का विश्लेषण पूरा करने का लक्ष्य दिया गया है। जबकि रेलवे ने अपने पहले किए गए लेखा परीक्षाओं पर पहले से ही कार्रवाई करनी आरंभ कर दी है और इन पहले किए गए लेखा परीक्षाओं पर आधारित सभी अधिष्ठानों में बचत की संभावनाएं तलाशना आरंभ कर दिया है, हालांकि, नई लेखा परीक्षा से नवीनतम तकनीकी विकास से संबंधित और इन ऊर्जा लेखा परीक्षाओं पर आधारित क्षेत्रों में संभावनाएं और तकनीक को उन्नत बनाने का कार्य आरंभ किया जाएगा ऐसी नई ऊर्जा संरक्षण तकनीक के प्रयोग के विस्तार को सुनिश्चित करने के लिए, वे इन नई तकनीकों के क्रियान्वयन से ऊर्जा बचत से होने वाले फायदे का मूल्यांकन भी करेंगे। इन लेखा परीक्षाओं के माध्यम से रेलवे, ऊर्जा अपव्यय वाले क्षेत्रों का भी पता लगाएगा और ऐसे अपव्यय को रोकने के लिए निगरानी के उपाय भी ढूढ़ेगा ।

      2014-15 में, रेलवे नॉन-ट्रैक्शन इलेक्ट्रिक पावर के लिए लगभग 2.5 बिलियन यूनिट की खपत करता है जिसकी औसत पावर लागत लगभग 6.50 प्रति यूनिट होती है। आरंभिक मूल्यांकन से यह प्रकट होता है कि नॉन-ट्रैक्शन साइड पर लाइटिंग में 25-40%, वाटर पंपिंग पर 30-35%, पंखों पर 15%, और एयर कंडीशनिंग पर लगभग 10-15% ऊर्जा की खपत होती है। तदनुसार ऊर्जा बचत संभावनाओं के निर्धारण के लिए वाटर पंपिंग स्टेशन,एयर कंडीशनिंग,लाइटिंग आदि जैसे क्षेत्रों के अंतर्गत विस्तृत ऊर्जा लेखा परीक्षा को लिया जाएगा

      ii) एलईडी लाइट को अपनाना

      हाल में ही एलईडी लाइटिंग उन्नत तकनीक से एलईडी लाइटों की कीमत में काफी कमी आ गई है जिससे लाइटिंग के अन्य माध्यमों की तुलना में एलईडी लाइटें काफी किफायती हैं और जिसमें न केवल 2-3 वर्षों तक बदले जाने और 5 वर्षों की वारंटी भी है बल्कि रखरखाव की लागत में कमी भी आएगी। अतः रेलवे ने विनिश्चय किया है कि भविष्य में, सभी नए अधिष्ठानों में और रेल कार्यालयों, स्टेशनों की पुरानी लाइटों, स्ट्रीट लाइटों आदि के बदले केवल एलईडी लाइटें ही खरीदी जाएंगी इस संबंध में 17 अप्रैल,2015 को नीति संबंधी दिशानिर्देश जारी किए गए हैं। रेलवे शायद पहला संगठन है जिसने संभवतः इसके सभी भावी अधिष्ठानों में एलईडी लाइटों के प्रयोग और सभी चालू लाइट फिटिंग्स के खराब होने पर उन्हें एलईडी लाइटों से बदले जाने संबंधी दिशानिर्देश जारी किए हैं। रेलवे ऊर्जा संरक्षित उपकरणों के आरंभ किए जाने के में नीति संबंधी और भी निर्णय लेने के लिए विचार कर रहा है।

      iii) रेलवे आवासों, कार्यालयों,रेलवे स्टेशनों अत्यधिक ऊर्जा संरक्षित सीलिंग पंखे

      60 वाट वाले चालू मार्केट औसत की तुलना में अधिक ऊर्जा संरक्षित (एसई) पंखों में 35 वाट की ही खपत होती है। 5 स्टार रेटिंग वाले पंखों (सर्वाधिक संरक्षित पंखे) की तुलना में एसई पंखे उल्लेखनीय रूप से ज्यादा ऊर्जा संरक्षित हैं, जिसमें 45-52 वाट की खपत होती है। यदि परंपरागत पंखों को एसई पंखों (ब्रशरहित डीसी मोटर) से बदल दिया जाए तो उससे 30-50 %ऊर्जा बचत की संभावना बढ़ जाती है। रेलवे में इस उपकरण के अधिकतम उपयोग को देखते हुए, भारतीय रेल ने उत्तर रेलवे पर एसई पंखों के प्रयोग को पाइलट प्रोजेक्ट के रूप में लिया है।

      iv) ऊर्जा प्रबंधन प्रणाली

      भारतीय रेल पर ऊर्जा संरक्षण और ईंधन संरक्षण के लिए किए गए सतत प्रयासों द्वारा लक्ष्य प्राप्ति हेतु , सभी रेल यूनिटों पर ISO: 50001 (ऊर्जा प्रबंधन प्रणाली) क्रियान्वयन शुरू किया जा रहा है। ये इकाइयां जो पहले से ही ISO: 9001 और ISO: 14000 प्रमाणित हैं, आरंभिक चरण में आगे रहेंगी। पहले चरण में ही उनके लिए इन मानकों को अपनाते हुए आगे बढ़ना सुगम होगा।

      ISO 50001 ऊर्जा प्रबंधन प्रणाली हेतु एक अंतर्राष्ट्रीय मानक है जो कि सार्वजनिक और निजी संगठनों में ऊर्जा संरक्षण का इष्टतम उपयोग करने के लिए एक सुदृढ़ आधार प्रदान करता है। इस मानक के लिए प्राप्त प्रमाणन, किसी भी संगठन के लिए उसकी संबंधित औद्योगिक इकाइयों में अनुकरणीय उदाहरण प्रस्तुत करते हुए, ऊर्जा प्रबंधन में बार-बार किए जाने वाले सुधारों के प्रति उसकी प्रतिबद्धता को दर्शाता है और साथ ही, यह भी सुनिश्चित करता है कि संबंधित विधायी और नियामक आवश्यकताओं को पूरा किया गया है।
      प्रमाणन के प्रमुख लाभ निम्नलिखित हैः

      • कम परिचालन लागत - ऊर्जा संरक्षण में व़ृद्धि करके उल्लेखनीय ढंग से वित्तीय बचत की जा सकती है।
      • बेहतर ऊर्जा संरक्षण- ISO 50001 एक ऐसी सुदृढ़ ऊर्जा प्रबंधन प्रणाली है जो कि यथासंभव संरक्षण को लगातार बेहतर बनाती रहती है।
      • कार्बन फुटप्रिंट कम करना – यह कार्बन फुटप्रिंट कम करता है और इससे लोग संगठन को अपनी सकारात्मक प्रतिक्रिया देंगे।
      • कानूनी अनुपालन- संवैधानिक और नियामक अपेक्षाएं संगठन पर किस तरह प्रभावी होती है और सदैव कानून का पालन करें, यह समझ में आता है।
      • व्यवसायिक साख बनाना(साबित करना) – स्वीकृत मानकों का निष्पक्ष सत्यापन संगठन की साख को बढ़ाता है।

  • नीति संबंधी प्रमुख दिशा निर्देश/परिपत्र/ नियमावली:

    • ऊर्जा संरक्षण:

      भारतीय रेल सामान्य विद्युत आपूर्ति प्रणालियों जैसे- एलईडी लाइट, स्टार रेटेड उपकरण आदि के प्रयोग पर विभिन्न दिशा निर्देश/परिपत्र जारी करते हुए अत्यंत सक्रियतापूर्वक नीतिगत पहल कर रही है। हाल ही में, पिछले दिनों भारतीय रेल में ऊर्जा संरक्षण और ऊर्जा प्रबंधन के संबंध में जारी किए गए कुछ प्रमुख नीतिगत दिशा निर्देश/परिपत्र और नियमावली नीचे दिए गए हैं:

      • सीएफएल और जीएलएस के स्थान पर ऊर्जा संरक्षण वाली लाइटों का प्रयोग करना।
      • ऊर्जा लेखा परीक्षा करने के संबंध में निर्देश।
      • आरडीएसओ द्वारा भारतीय रेलों पर अधिष्ठापन हेतु ऊर्जा लेखा परीक्षा सेवाओं के लिए संविदा प्रक्रिया से संबंधित ऊर्जा लेखा परीक्षा मैनुअल एवं मानक टेम्पलेट तैयार करना और जारी करना।
      • रेलों पर स्टार लेबल वाले उत्पादों का प्रयोग।
      • एलईडी बल्ब के संबंध में डीईएलपी योजना का लाभ लेने हेतु रेल कर्मचारियों के लिए निर्देश।

      हाल ही में, श्री सुरेश प्रभु, रेल मंत्री और श्री पीयूष गोयल, राज्यमंत्री, स्वतंत्र कार्यप्रभार/विद्युत, कोयला और नवीन एवं अक्षय ऊर्जा, की उपस्थिति में ऊर्जा संरक्षण में सुधार करने में सहयोग देने हेतु बीईई और भारतीय रेल के बीच एक समझौता ज्ञापन हस्ताक्षर किया गया।
      समझौता ज्ञापन के मुख्य बिंदु हैं:

      • रेलों पर विद्युत लागत कम करने के लिए पावर सेक्टर में हो रहे विभिन्न विकास पर भारतीय रेल और विद्युत मंत्रालय के बीच जानकारी साझा करना।
      • रेल मंत्रालय और ऊर्जा संरक्षण ब्यूरो(बीईई), रेलों पर ऊर्जा के संरक्षित प्रयोग को और अधिक बेहतर बनाने के लिए प्रौद्योगिकी की पहचान करेंगे।

      इसके अतिरिक्त, रेल ऊर्जा प्रबंधन कंपनी लिमिटेड और रेलवे में ऊर्जा संरक्षण परियोजनाओं के क्रियान्वयन के लिए ऊर्जा संरक्षण सेवाएं लिमिटेड के बीच एक समझौता ज्ञापन पर भी हस्ताक्षर किए गए।

      इन समझौता ज्ञापनों का उद्देश्य भावी समाधानों के लिए एक रूपरेखा तैयार करना और इसके एनर्जी मिक्स में परिवर्तन लाने के लिए रेलवे को सुविधा उपलब्ध कराना है। वर्तमान समय की आवश्यकताओं , जिसमें कि स्टेकहोल्डरों के बीच में गहन समन्वय स्थापित करने और एक दूसरे के साथ मिलजुल कर कार्य करने और एक दूसरे को समझने के लिए इसकी आवश्यकता है जिससे जनसामान्य को शीघ्र सुपुर्दगी की जा सके। ये समझौता ज्ञापन समग्र रूप में पावर सेक्टर में हो रहे विभिन्न विकास कार्यों का लाभ लेने हेतु रेलवे के लिए संभव बनाने के लिए पावर सेक्टर में संसाधनों के संरक्षित और विश्वसनीय उपयोग के लिए मार्ग प्रशस्त करेंगे।

      इस अवसर पर एमएनआरई और रेल मंत्रालय के बीच भी एक समझौता ज्ञापन पर हस्ताक्षर किए गए। रेलवे, देश के सबसे बड़े बिजली उपभोक्ताओं में से एक है और अक्षय ऊर्जा के क्षेत्र में भी वह अग्रणी बनना चाहेगी और ऊर्जा के उपयोग संरक्षण के लिए प्रौद्योगिकी में प्रभुत्व हासिल करना चाहेगी। ऊर्जा मंत्रालय, नवीन और अक्षय ऊर्जा मंत्रालय एवं ऊर्जा संरक्षण ब्यूरो के साथ किए गए इन तीनों समझौता ज्ञापनों से मांग के आधार पर विद्युत उत्पादन करते हुए रेलवे के दृष्टिकोण से पूरे ऊर्जा क्षेत्र का ध्यान रखा जा सकेगा और भारत सरकार के लिए यह बताना संभव हो सकेगा कि कैसे एक दूसरे से सीख कर विश्व स्तरीय प्रौद्योगिकी का दोहन कर आगे बढ़ा जा सकता हैं और व्यापक रूप से लोगों को सस्ती सेवाएं कैसे उपलब्ध कराई जा सकती हैं। इन समझौता ज्ञापनों के जरिए रेलवे को तकनीकी दक्षता और पावर सेक्टर में उपलब्ध ओपन प्रशिक्षण सुविधाएं प्रदान की जाएगी

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  • भारतीय रेल पर ऊर्जा संरक्षण का सफर:

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      भारतीय रेल सदा से ही ऊर्जा बचत में सतर्क रही है क्योंकि ऊर्जा बचत ही ऊर्जा उत्पादन है। भारतीय रेल ने ऊर्जा बचत की य़ात्रा काफी पहले ही प्रारंभ कर दी थी और हर स्तर पर उपलब्ध सर्वश्रेष्ठ प्रौद्योगिकी का लाभ उठाया , चाहे वो ऊर्जा संरक्षित टी5 और सीएफएल फिटिंग्स से टी8 एफटीएल का बदला जाना हो, या एलईडी लाइटों का प्रावधान, ऊर्जा संरक्षित सीलिंग पंखे, ऑक्यूपेंसी सेंसर, स्टार रेटेड उपकरण आदि हो। इन प्रयासों के परिणामस्वरूप ,पूर्व में भी कनेक्टेड लोड में लगभग 5% वृद्धि के बावजूद 2011-12 के दौरान नॉन-ट्रैक्शन ऐप्लीकेशन के लिए बिजली की 1.03% की बचत की गई है।

      पिछले वर्षों में क्षेत्रीय रेलों द्वारा प्राप्त किए गए राष्ट्रीय ऊर्जा संरक्षण पुरस्कार निम्न हैं-

      SN Year Railway/Year Hospital/Year Building/Year Rly. station Rly. workshops Genl. Open category Total/Year
      1 2006 to 2009 2 - 3 1 - - - - 3
      2 2010 5 2 - - - - 7
      3 2011 4 1 1 - - - 6
      4 2012 4 4 3 - - - 11
      5 2013 4 4 5 4 4 1 22
      6 2014 5 - - 4 4 - 13

      ऊर्जा संरक्षण के लिए नॉन ट्रैक्शन साइड पर क्रियान्वित किए गए/किए जा रहे कुछ मुख्य उपाय नीचे सूचीबद्ध हैं-

      • ट्यूब लाइटों के स्थान पर एलईडी ट्यूब लाइटों का लगाना।
      • ऊर्जा संरक्षित वाटर कूलरों का प्रयोग।
      • 90 वाट सीलिंग पंखों के स्थान पर 60 वाट के पंखों का लगाया जाना
      • जीएसएम आधारित तकनीकी सहित पंप ऑटोमेशन।
      • ऊर्जा संरक्षित पंपों, वाटर कूलरों का प्रयोग।
      • 70% / 30% सर्किटों के विसंयोजन सहित माइक्रोकंट्रोलर आधारित स्वचालित प्लेटफॉर्म प्रकाश प्रबंधन प्रणाली।
      • 3 स्टार और उससे ज्यादा स्टार लेबल वाले विद्युत उत्पादों एवं उपकरणों का प्रयोग।
      • समपार फाटकों के लिए सौर आधारित एलईडी प्रकाश प्रणाली।
      • विद्युत गीज़रों के स्थान पर सोलर वाटर हीटर का प्रयोग।
      • कार्यालयों में ऑक्यूपेंसी सेंसर लगाना
      • वर्ष 2009-10 में स्वच्छ विकास तंत्र के अंतर्गत भारतीय रेल द्वारा इसके कर्मचारियों को 14 लाख सीएफएल निःशुल्क वितरित किए गए। यह प्रोजेक्ट अत्यंत सफल रहा और 26 नवंबर-2010 को जलवायु परिवर्तन विषय पर आयोजित यूनाइटेड नेशंस फ्रेमवर्क कन्वेंशन (यूएनएफसीसी) में इसे रजिस्टर भी किया गया।
      • विभिन्न प्रकार के लोड के स्वचालित और स्मार्ट नियंत्रण के लिए दिल्ली मंडल में ऑनलाइन मीटर डेटा अधिग्रहण (एम डी ए एस) के संबंध में “भारतीय रेल में ऊर्जा संऱक्षण” पर भारतीय रेल-यूएनपीडी कार्यक्रम के अंतर्गत पाइलट प्रोजेक्ट आरंभ किया गया। इस प्रणाली से रियल टाइम मॉनीटरिंग और नियंत्रण से बिजली के अपव्यय को कम करने और समाप्त करनें में सहायता मिलेगी।
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      Energy Efficient LED based Facade Lighting at Bikaner Railway Station (North Western Railway)

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      बुकिंग कार्यालय, जयपुर में एलईडी लाइटिंग


  • घरेलू संरक्षित लाइटिंग कार्यक्रम (डीईएलपी) योजना के अंतर्गत रेल कर्मचारियों के लिए एलईडी बल्ब योजना का क्रियान्वयन:

    • विद्युत मंत्रालय, मेसर्स एनर्जी एफिशिएंसी सर्विस लिमिटेड (ईईएसएल) के जरिए घरेलू संरक्षण लाइटिंग कार्यक्रम (डीईएलपी) योजना के अंतर्गत व्यापक पैमाने पर लोगों को 7 वाट के ऊर्जा संरक्षित एलईडी बल्ब के वितरण की सुविधा मुहैया करा रहा है। यह लाभ रेल कर्मचारियों को भी दिया सकता है।.

      एलईडी लैंप का लाभ देने संबंधी एक ऐसे ही सफल कार्य योजना का आरंभ सबसे पहले डीएलडब्ल्यू/वाराणसी में किया गया था और उसके बाद इसका विस्तार ईईएसएल द्वारा अपने अधिकार में लिए गए सभी स्थानों तक किया गया। .

      ऊर्जा संरक्षित एलईडी बल्ब से बिजली की काफी बचत होती है और इसके द्वारा हर घर के बिजली बिल में कमी आएगी । साथ ही, इससे रेल व्यवस्था पर बिजली की खपत में कमी आएगी। क्षेत्रीय रेलों पर 3 माह के भीतर रेल कर्मचारियों द्वारा 1.5 लाख से अधिक एलईडी लैंप लैंप खरीदे गए हैं।

  • हरित भवन

    • आई आर आई सी ई एन न्यू एडमिनिस्ट्रेटिव ग्रीन बिल्डिंग.

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      भारतीय रेल सिविल इंजीनियरिंग संस्थान एक प्रमुख केंद्रीकृत प्रशिक्षण संस्थान है जो भारतीय रेल के अधिकारियों, रेल के सार्वजनिक उपक्रमों(डीएफसीसीआईएल, राइट्स, केआरसीएल, एनटीपीसी आदि) और विदेश स्थित रेल संगठनों के अधिकारियों की प्रशिक्षण संबंधी आवश्यकताओं की पूर्ति करता है। यह संस्थान एक चार मंजिला भवन है जिसमें कर्मचारियों के लिए आरामदेह परिस्थितियों को ध्यान में रखते हुए आधुनिक शिक्षण सामग्री/ साधनयुक्त उचित रूप से प्रकाशित वातानुकूलित कक्षाएं, अत्याधुनिक कंम्प्यूटर केंद्र, पूर्णतया सुसज्जित प्रयोगशाला, पुस्तकालय और मॉडल रूम है। इसमें एकसाथ 200 व्यक्तियों को प्रशिक्षित किया जा सकता है। नवंबर-2013 में इरिसेन को नए कॉम्प्लेक्स में स्थानांतरित कर दिया गया है। भारत के महामहिम राष्ट्रपति द्वारा दिनांक 14.02.2013 को नई दिल्ली में इरिसेन को हरित भवन का पुरस्कार दिया गया है। .

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      1. ऊर्जा बचत संबंधी विशेषताएं:

      निम्न उपायों के द्वारा कुल 46% ऊर्जा की बचत की गई जो कि ऐसे भवनों के लिए दुर्लभ है):

      • भवन को इस प्रकार डिज़ाइन किया गया है कि दिन में भरपूर रोशनी रहे साथ ही उसमें प्राकृतिक रोशनी की बेहतर उपलब्धता के लिए मध्यभाग को खुला रखा गया है।
      • ऑक्यूपेंसी सेंसर वाले ऊर्जा संरक्षित एलईडी लाइटिंग फिक्सर।
      • 4.85 तक सीओपी वाले सक्षम वीआरवी एसी यूनिट
      • 40 केवीए वाले सौर फोटो वोल्टेइक सेल्स का प्रयोग करते हुए अक्षय ऊर्जा का प्रावधान।
      • दक्षिणी और पश्चिमी दीवारों पर पृथक्कर्ण के साथ विवर में 25 मिमी के इंसुलेशन फिलर वाली फ्लाई ऐश ईंटों की दोहरी दीवार
      • दक्षिण,पश्चिम और पूर्व में डबल ग्लेज़्ड उच्च क्षमता युक्त शीशे की खिड़कियां.

      प्रमुख विशेषताएं

      • आरंभ होने का वर्ष- 2009-10
      • कार्य पूरा होने का वर्ष- जनवरी 2012
      • लागत- Rs.18.00 करोड़ रू. (अनुमानित)
      • ढांचे का प्रकार- आर.सी.सी फ्रेम
      • मंजिलों की सं.- भूतल+4
      • प्रत्येक मंजिल का क्षेत्रफल- 881 वर्ग मीटर
      • कुल कुर्सी क्षेत्र- 4405.90 वर्ग मीटर


      हरित भवन के रूप में मुख्य उदेश्य

      • ऊर्जा खपत को कम करना
      • जल की खपत कम करना और संरक्षित जल प्रबंधन
      • निर्माण के दौरान संसाधनों का कुशलतापूर्वक प्रयोग
      • निर्माण अपशिष्ट कम करना
      • पारस्थितिकी में विनाश को कम करना


      पर्यावरण की दृष्टि से ठोस तकनीक

      • पर्याप्त प्रकाश व्यवस्था के मद्देनज़र 2 कटआउट के साथ भवन को 40% ग्लेजिंग एरिया के अनुसार डिज़ाइन किया गया है जिससे कि पारंपरिक ऊर्जा की मांग को कम किया जा सके। लाइटिंग की परिकल्पना सर्वोत्कृष्ट है। इससे ऊर्जा संरक्षण इंडेक्स और ऊष्मीय(थर्मल) सुविधाओं की पूर्ति पूरी तरह से होती है। समरूप भवनों की तुलना में उपरोक्त उपायों से 20% तक ऊर्जा बचाई जा सकती है।
      • लो-फ्लो सेंसर आधारित मूत्रालयों, नलों और दोहरे फ्लश वाले टैंक का प्रयोग करके 50% तक पानी की खपत कम की जा सकती है।
      • अपशिष्ट पानी को सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट में तृतीय मानक के तौर पर प्रयोग किया जा सकता है जो एफएबी तकनीक पर कार्य करता है। इस संसाधित अपशिष्ट पानी को लॉन और पौधों की सिंचाई में इस्तेमाल किया जा सकता है।
      • भारतीय रेल का यह पहला हरित भवन है जिसमें इसकी सावधानीपूर्ण योजना और सभी हरित पहलुओं को शामिल करने के कारण जीआऱआईएचए द्वारा इसे “थ्री स्टार रेटिंग” दी गई है।
      • छत से और इसके परिभ्रमण क्षेत्र में आने वाले संपूर्ण वर्षा जल के लिए जल संरक्षण की व्यवस्था की गई है जहां प्रति वर्ष 25 लाख प्रति लीटर की खपत की तुलना में 48 लाख लीटर है।
      • आउटडोर लाइटिंग के लिए प्रोग्रामेबल डे-लाइट सेंसिंग कंट्रोलर सहित स्टैंड अलोन सोलर स्ट्रीट लाइटिंग प्रयोग की जाती है।


  • रेल प्रशासनिक भवनों की स्टार रेटिंग

    • ऊर्जा खपत के संबंध में भारतीय भवनों की ऊर्जा संरक्षण सामर्थ्य 20-30% है, ऊर्जा संरक्षण ब्यूरो (बीईई) ने हाल ही में विशिष्ट ऊर्जा उपयोगों पर आधारित कार्यालयी भवनों की स्टार रेटिंग प्रारंभ की है। इस योजना के तहत कार्यालयी भवनों को 1-5 स्टार के पैमाने पर आंका जाता है, जिसमें 5 स्टार अर्जित करने वाले भवन को सर्वाधिक ऊर्जा संरक्षण करने वाला भवन माना गया है। इस कार्यक्रम के लिए देश के 5 जलवायु क्षेत्रों में भवनों की 5 कोटियों - कार्यालयी भवन, होटल, हॉस्पीटल, मॉल एवं आईटी पार्क की पहचान की गई है।

      ऊर्जा संरक्षण ब्यूरो ने सभी मुख्य भवनों, ऊर्जा निष्पादन सूचकांक पर जिनका कनेक्टेड लोड 500 किलोवाट या उससे अधिक है, को चिन्हित करना प्रारंभ कर दिया है। भवनों के इस स्टार रेटिंग कार्यक्रम के फलस्वरूप विशिष्ट ऊर्जा उपयोग की दृष्टि से भवनों की वास्तविक निष्पादन क्षमता के आधार पर ऊर्जा संरक्षित भवनों की बाजार में मांग बढ़ेगी । ऊर्जा संरक्षण बढ़ाने के उद्देश्य से, रेलों को, रेलवे ने बोर्ड के संदर्भाधीन पत्र (i) के अनुसार उन सभी प्रमुख भवनों के लिए, जिन पर 500 किलोवाट या उससे अधिक का कनेक्टेड लोड है, ऊर्जा संरक्षण ब्यूरो से स्टार रेटिंग प्राप्त करने के लिए सूचित किया गया है।

  • आईसीएफ, चेन्नई प्रशासनिक भवन के लिए '5 स्टार' रेटिंग

    • आईसीएफ, चेन्नई प्रशासनिक भवन को 13 जुलाई,2015 को ऊर्जा संरक्षण ब्यूरो (बीईई), विद्युत मंत्रालय, भारत सरकार द्वारा 5 स्टार दिए गए हैं। इस भवन को दी गई 5 स्टार रेटिंग बीईई द्वारा संस्थापित कार्यालय भवनों की श्रेणी में दी गई सर्वोत्तम रेटिंग है।

      आईसीएफ प्रशासनिक भवन “उष्ण एवं आर्द्र जलवायु क्षेत्र में वातानुकूलित भवनों” की क्षेणी में आता है और इस भवन ने बीईई द्वारा निर्धारित 100 केडब्ल्यूएच/वर्गमीटर/वर्ष के मानदंड की तुलना में 93.85 केडब्ल्यूएच/वर्गमीटर/वर्ष का ऊर्जा निष्पादन सूचकांक प्राप्त किया है। आईसीएफ का यह निष्पादन सूचकांक प्रभावी ऊर्जा संरक्षण उपायों को अपनाकर और भवन में ऊर्जा संरक्षण उपकरणों को लगाकर प्राप्त किया गया है। अपनाए गए कुछ ऊर्जा संरक्षण उपायों में 3 स्टार और उससे अधिक की रेटिंग वाले एयर कंडीशनर, वीआरएफ नियंत्रित एयर कंडीशनिंग सिस्टम, वीवीएफ कंट्रोल युक्त लिफ्ट में पारंपरिक कंट्रोल का बदला जाना, चैंबर्स और वाशरूम से ऑक्यूपेंसी सेंसर्स का प्रावधान,एलईडी लाइटिंग, फ्लड लाइट सिस्टम के स्थान पर एलईडी दर्शना(façade) लाइटें।

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      कार्यालय भवनों की श्रेणी के अंतर्गत बीईई स्टार लेबल से पुरस्कृत किए गए रेलवे भवनों की सूची

      सं. भवन का नाम शहर जलवायु क्षेत्र: स्टार लेबल से पुरस्कृत
      1 मंडल कार्यालय त्रिचरापल्ली उष्ण और आर्द्र 5 स्टार
      2 मंडल कार्यालय, दक्षिण रेलवे, त्रिवेंद्रम थिरूवनंतपुरम उष्ण और आर्द्र 3 स्टार
      3 मंडल रेल कार्यालय, रंगिया मंडल रंगिया, असम उष्ण और आर्द्र 4 स्टार
      4 मंडल रेल प्रबंधक कार्यालय, पू.सी.रे. तिनसुकिया, असम उष्ण और आर्द्र 4 स्टार
      5 प्रधान कार्यालय भवन, पू.सी.रे. मालीगांव,गुवाहाटी, असम उष्ण और आर्द्र 5 स्टार
      6 मंडल रेल प्रबंधक कार्यालय भवन, कटिहार कटिहार, बिहार उष्ण और आर्द्र 5 स्टार
      7 मंडल रेल प्रबंधक कार्यालय लमडिंग उष्ण और आर्द्र 5 स्टार
      8 मंडल रेल प्रबंधक कार्यालय अलीपुरद्वार,प.बंगाल उष्ण और आर्द्र 5 स्टार
      9 मंडल रेल प्रबंधक कार्यालय अहमदाबाद, गुजरात उष्ण और आर्द्र 5 स्टार
      10 मंडल रेल प्रबंधक कार्यालय मदुरई, तमिलनाडु उष्ण और आर्द्र 4 स्टार
      11 निर्माण संगठनों के प्रशासनिक कार्यालय,द.रे.,एग्मोर,चेन्नई चेन्नई, त.नाडु उष्ण और आर्द्र 5 स्टार
      12 मंडल रेल प्रबंधक कार्यालय भावनगर, गुजरात उष्ण एवं शुष्क 2 स्टार
      13 मंडल रेल प्रबंधक कार्यालय विजयवाड़ा मिश्रित 3 स्टार
      14 रेल निलयम, द.म.रे. सिकंदराबाद मिश्रित 2 स्टार
      15 मंडल रेल प्रबंधक कार्यालय, अंबाला कैंट पंजाब मिश्रित 5 स्टार
      16 उत्तर रेलवे,प्रधान कार्यालय नई दिल्ली मिश्रित 5 स्टार
      17 मंडल रेल प्रबंधक कार्यालय, मुरादाबाद मुरादाबाद, उ.प्र. मिश्रित 5 स्टार
      18 मंडल रेल प्रबंधक कार्यालय, वड़ोदरा गुजरात उष्ण एवं शुष्क 5 स्टार
      19 मंडल रेल प्रबंधक कार्यालय, फिरोज़पुर कैंट फिरोज़पुर कैंट, पंजाब मिश्रित 5 स्टार
      20 मंडल रेल प्रबंधक कार्यालय, राजकोट राजकोट, गुजरात उष्ण एवं आर्द्र 5 स्टार
      21 मंडल रेल प्रबंधक कार्यालय, मुंबई सेंट्रल, महाराष्ट्र मुंबई सेंट्रल, महाराष्ट्र उष्ण एवं आर्द्र 5 स्टार
      22 मंडल रेल प्रबंधक कार्यालय, जबलपुर जबलपुर, मध्य प्रदेश मिश्रित 5 स्टार
      23 मंडल रेल प्रबंधक कार्यालय, रतलाम रतलाम, मध्य प्रदेश मिश्रित 5 स्टार

      आईसीएफ के लिए आईएसओ 50001:2011 आईसीएफ का प्रमाणन

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      हाल ही में आईसीएफ को आईएसओ 50001:2011 प्रमाणन का पुरस्कार मिला है,प्रमाणपत्र की प्रतिलिपि ऊपर दी गई है।

  • विद्युत कर्षण साइड पर क्रियान्वित किए गए/क्रियान्वित किए जा रहे प्रमुख उपाय हैं:

    • इलेक्ट्रिकल मल्टीपल यूनिट (ईएमयू)

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      1. 2007 से मुंबई उपनगरीय क्षेत्र में 3 फेज़ आईजीबीटी टाइप प्रोपल्शन सिस्टम वाले 116 ऊर्जा संरक्षित एसी/डीसी रेक रिजेनरेटिव ब्रेकिंग फीचर्स,सहित शुरू किए गये। पश्चिम रेलवे में रिजेनरेटिव ब्रेकिंग सहित 64 ईएमयू रेकों का कुल ऊर्जा उत्पादन प्रतिवर्ष 82.6 मिलियन किलोवाट घंटा है और कुल बचत 65.39 करोड़ प्रति वर्ष है। मध्य रेलवे में रिजेनरेटिव ब्रेकिंग सहित 52 ईएमयू रेकों का कुल ऊर्जा रिजेनरेशन 66.7 मिलियन किलोवाट घंटा प्रतिवर्ष है और कुल बचत 53.53 करोड़ प्रति वर्ष है।

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      पश्चिम रेलवे के मुंबई उपनगर में विद्युत कर्षण प्रणाली के 1500 वोल्ट डीसी के 25 केवी एसी कन्वर्जन के कारण ऊर्जा लागत में कमी ।

      1.0 डीसी-एसी कन्वर्जन परियोजना के अधिष्ठापन की स्थिति :

      • अप थ्रू और डाउन थ्रू नई लाइन बोरीवली-विरार 16.07.2007
      • अप थ्रू और डाउन थ्रू लोकल लाइनें बोरीवली-विरार सेक्शन 28.02.2010
      • विले पार्ले से बोरीवली तक सभी लाइनें 13.11.2011
      • विले पार्ले से चर्चगेट सेक्शन तक 05.02.2012

      • रिजेनरेटिव ब्रेकिंग सहित ईएमयू 74 रेक
      • वड़ोदरा शेड पर रिजेनरेटिव ब्रेकिंग सहित डब्ल्यूएपी 5 लोको 38 लोको

      2.0 वर्ष 2007-08 से आगे मुंबई उपनगरीय क्षेत्र में विद्युत खपत (मल्टीपल यूनिट में) और ढुलाई किया गया यातायात( मिलियन जीटीकेएम में)

      वर्ष ऊर्जा खपत मल्टीपल यूनिट में कुल ढुलाई किया गया यातायात (कुल मिलियन टन) किमी
      2007-08 318 7318.32
      2008-09 327 7817.26
      2009-10 319 8334.33
      2010-11 307 8508.38
      2011-12 300 8892.4
      2012-13 315 9285.94
      2013-14 341 10043.39
      2007-08 के संदर्भ में 2013-14 में % वृद्धि 7.23% 37.23%

      • यातायात में वृद्धि कुल टन किमी ------- 37.23%

      • जबकि ऊर्जा खपत में वृद्धि ------- 7.23%

      3.0 सारणी से यह देखा जा सकता है कि वर्ष 2013-14 में 341 मल्टीपल यूनिट की खपत करके 10043.39 कुल मिलियन टन किमी की ढुलाई हुई जबकि वर्ष 2007-08 में 318 मल्टीपल यूनिट की खपत करके 7318.32 कुल मिलियन टन किमी की ढुलाई की गई। वर्ष 2007-08 में प्रचलित कर्षण प्रणाली सहित ऊर्जा संरक्षण के अनुसार 436 मल्टीपल यूनिट की खपत करते हुए 10043.39 कुल मिलियन टन किमी की ढुलाई की जा सकती थी । ये आंकड़े वर्ष 2013-14 के यथानुपाती आधार पर 2007-08 की ऊर्जा खपत को प्रोजेक्ट करके प्राप्त किए गए हैं. वर्ष 2013-14 में वास्तविक खपत 341 एमयू है। इस प्रकार (436एमयू 341 एमयू)=95 एमयू की बचत हुई। इसका अर्थ है कि वर्ष 2013-14 में संरक्षण और ईएमयू और लोको के रिजेनरेटिव ब्रेकिंग सिस्टम से 21.71% की शुद्ध बचत हुई।

      4.0 2013-14 मुंबई उपनगरीय क्षेत्र में प्रचलित दर सूची के अनुसार, ऊर्जा लागत प्रति यूनिट 6.86 रू. है। 95 एमयू की वार्षिक बचत 65.2 करोड़ रू.(6.86x95) की ऊर्जा लागत बचत के रूप में जमा किया गया जो कि मुंबई उपनगरीय क्षेत्र में 2013-14 में 233.92 करोड़ रू. के अदा किए गए ऊर्जा बिल का 27.8% है।

      • डीसी ईएमयू रेकों को बदले जाने के लिए 3 फेज़ आईजीबीटी आधारित प्रोपल्शन सिस्टम और रिजेनरेटिव ब्रेकिंग सिस्टम वाले 70 ऊर्जा संरक्षित रेक आईसीएफ में निर्माणाधीन हैं।
      • पावर फैक्टर में सुधार करने और एलएचबी ईओजी एसी कोचों में फीडर करेंट और पावर कम करने के लिए संधारित्र (कैपेसिटर) बैंक लगाए गए हैं।
      • पावर फैक्टर करेक्शन सुनिश्चित करता है कि कर्षण उप केंद्रों में पावर फैक्टर को 0.95 पर बनाए रखा जाता है।
      • ट्रैक्शन सब स्टेशनों में स्टैंडबाई ट्रांसफॉर्मर को स्विच ऑफ करने से कुल वार्षिक ट्रैक्शन ऊर्जा खपत के लगभग 0.3-0.5% तक की बचत होती है।
      • उन्नत और अवनत ढलान पर रास्ते में गाड़ियों के पावर रेग्यूलेट हेतु गाड़ियों के लिए मार्ग में कोस्टिंग और पावर बोर्ड की व्यवस्था करना
      • दिन और रात के समय टैप स्थिति के उपयुक्त परिचालन द्वारा ओएचई वोल्टेज को 27.5 केवी पर बनाए रखा जाता है।
      • कर्षण उपकेंद्रों पर यार्ड लाइटों को न्यूनतम आवश्यकतानुसार बंद रखना।
      • 0.5 श्रेणी मीटर की शुद्धता को बनाए रखने के लिए ट्राई वेक्टर मीटर का कैलिब्रेशन वार्षिक तौर पर किया जाता है।
      • स्पार्कल्स करंट कलेक्शन सुनिश्चित करने के लिए, ओलीवर-जी नियमित रूप से प्रयोग किया जाता है ताकि स्पार्क लोकेशन अंटेंड किया जा सके और स्पार्क फ्री करेंट कलेक्शन को बनाए रखा जा सके।
      • कर्षण सबस्टेशन की नियमित ऊर्जा लेखा परीक्षा और इसका क्रियान्वयन
      • शेडों और यार्ड में बेकार पड़े हुए विद्युत लोको को शंट डाउन रखा जाता है।
      • यदि यार्ड में 15 मिनट से अधिक डिटेंशन होता है तो ब्लोअर को स्विच ऑफ करने के लिए लोको पाइलटों की नियमित काउंसलिंग की जाती है।
      • अधिकतम कोस्टिंग को अपनाने के लिए लोको पाइलटों की नियमित काउंसलिंग की जाती है।
      • मल्टी यूनिट की स्थिति में ट्रेलिंग लोको की स्विचिंग
      • ऊर्जा खपत को मॉनीटर करने के लिए ईएलएस/बीआईए के सभी विद्युत इंजिनों में माइक्रो प्रोसेसर आधारित ऊर्जा मीटर लगाए गए हैं. लोकोमोटिव के विशिष्ट ऊर्जा खपत (SEC) परिकलित की जा सकती है और सुधारात्मक कदम उठाने के लिए मानदंड मूल्यों के साथ उसकी तुलना भी की जा सकती है।
      • ऊर्जा खपत का मानदंड निर्धारण

  • भारतीय रेल पर बिजली खपत डेटा का विश्लेषण :

    • भारतीय रेल ने 15 अप्रैल,2014 को शुरू की गई रेल सेवर वेबसाइट “विद्युत एनर्जी” पर संपूर्ण डेटा लॉगिंग के द्वारा इसके ट्रैक्शन और नॉन-ट्रैक्शन बिजली खपत डेटा का विश्लेषण शुरू किया है ।

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      प्रणाली की प्रमुख विशेषताएं:

      • विद्युत खपत प्रवृत्ति की मॉनीटरिंग करती है
      • डैशबोर्ड मॉनीटरिंग करती है
      • अनुकूल(अपने हिसाब से) रिपोर्टिंग करती है
      • ऑनलाइन पोर्टल का उपयोग करने के लिए आसान
      • यह निर्णय समर्थन प्रणाली है
      • इसमें एसएमएस नोटीफिकेशन की सुविधा है

      प्रमुख मॉड्यूल

      • ऊर्जा खपत मॉड्यूल
      • ऊर्जा संरक्षण मॉड्यूल
      • अक्षत ऊर्जा मॉड्यूल
      • डैशबोर्ड मॉड्यूल और प्लानिंग मॉड्यूल
      • अनुलग्नक रिपोर्ट म़ॉड्यूल
      • कस्टमाइज्ड रिपोर्ट मॉड्यूल
      • संगठन पदानुक्रम, संदेश केंद्र, चित्र दीर्घा आदि
  • विद्युत नॉन-ट्रैक्शन में ऊर्जा उपयोग बेहतर करने के लिए भावी पहल:

    • ऊर्जा संरक्षण को और बेहतर बनाने के उद्देश्य से भारतीय रेल ने ऊर्जा संरक्षण बेहतर बनाने के लिए कुछ पाइलट प्रोजेक्ट आरंभ किए हैं जिसका उद्देश्य आने वाले दिनों में ऐसी परियोजनाओं को कई गुना सफल बनाना है।

      1. ऑप्टीमल लाइट कंट्रोल सिस्टम

      ऑप्टीमल लाइट कंट्रोल सिस्टम एक व्यापक प्रणाली है जो सभी प्रकार के लाइटिंग लोड को नियंत्रित करता है। यह पूर्णतया कंप्यूटर द्वारा नियंत्रित प्रणाली है जिसमें प्रकाश स्तर में आनुपातिक कमी किए बिना अप्लाइड वोल्टेज घटा कर ऊर्जा खपत में कमी की जा सकती है।

      2. स्मार्ट सेंस एवं स्मार्ट ग्रिड सिस्टम

      परियोजना का उद्देश्य बिल्डिंग कॉम्प्लेक्स में विजुअलाइजेशन और ऊर्जा प्रबंधन सेवाएं प्रदान करने लिए ऊर्जा खपत, डीजल जेनरेटरों से ऊर्जा उत्पादन, कुल रनिंग घंटे, ब्लैक आउट के कुल घंटे, ब्लैकआउट फ्रीक्वेंसी आदि मॉनीटर करना है।

      3. नॉन-एसी कोचों में एलईडी लाइटों का रेट्रो फिटमेंट

      मौजूदा ट्यूब लाइट फिटिंग्स में कम रोशनी,लाइटों का असमान वितरण, एक निर्धारित अवधि के बाद लाइटों का बार-बार अनुरक्षण/बदला जाना, बाहरी धूल मिट्टी से खराब दृश्यता और अधिक बिजली की खपत जैसी कुछ सीमाएं है।

      ट्यूब लाइट फिटिंग्स की कमियों को दूर करने के लिए, 110 वोल्ट डीसी पर ऊर्जा संरक्षित एलईडी आधारित कम रखरखाव वाली और लंबे समय तक चलने वाली ट्यूब लाइटें (2 फीट 9 वाट) परिचालन हेतु उपयुक्त हैं, जिसमें मेल/एक्सप्रेस पैसेंजर गाड़ियों के विभिन्न कोचों में लगाए जाने के लिए माउंटिंग की व्यवस्था भी है, इससे 40% तक ऊर्जा की बचत होगी।

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      4. नई दिल्ली रेलवे स्टेशन पर स्वचालित लाइट और फैन नियंत्रण प्रणाली

      यह इंटरनेट पर सेंट्रल एससीएडीए( SCADA) से लाइट की मॉनीटरिंग और कंट्रोल के लिए लाइट फीडर खंभों के अंदर संस्थापित इंटेलीजेंट फील्ड डिवाइस आधारित जीपीआरएस से युक्त हैं।

      5. पम्पिंग व्यवस्था का स्वचालन

      इस योजना से सिस्टम कार्यकुशलता/कार्य निष्पादन, उपकरणों/लोगों की सुरक्षा, और समय से रखरखाव पर ध्यान देने से डाउन टाइम में कमी को सुधारा जा सकता है। यह प्रणाली ट्यूब वेल पंप साइटों पर रिमोट टर्मिनल यूनिटों के माध्यम से काम करती है। ये आरटीयू सेंट्रल सर्वर युक्त जीपीआरएस के माध्यम से जुड़े हैं। मॉनीटरिंग और कंट्रोल के लिए सॉफ्टवेयर का प्रयोग किया जाता है और यह इंटरनेट के माध्यम से वेब ब्राउज़र के द्वारा होता है। इस वेब आधारित ऐप्लीकेशन सॉफ्टवेयर में रिपोर्टों, अलर्ट्स और अलार्म के विन्यास की सुविधा है।

      6. अधिक(super)ऊर्जा संरक्षित पंखों की व्यवस्था (दिल्ली200, अंबाला200)

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      एक परंपरागत सीलिंग पंखे की तुलना में अधिक ऊर्जा संरक्षित पंखों में लगभग 35 वाट की खपत होती है और परंपरागत सीलिंग पंखे की तुलना में 50% से अधिक विद्युत ऊर्जा की बचत होती है।






      35 वाट के ऊर्जा संरक्षित पंखे

      7. लिफ्ट के लिए अस्थिर वोल्टेज अस्थिर फ्रीक्वेंसी वाली वीवीवीएफ ड्राइव का संस्थापन

      एलिवेटर एक वीवीवीएफ ड्राइव से युक्त है,जो ड्राइविंग मोटर को नियंत्रित करने के लिए एलिवेटेड कंट्रोलर के साथ कार्यात्मक रूप से संबंद्ध है, । वीवीवीएफ आधारित तकनीक गति नियंत्रण के साथ एलिवेटर का संचालन सुनिश्चित करती है। वीवीवीएफ ड्राइव के परिणामस्वरूप आरंभिक करंट और ब्रेक लाइनर की घर्षण संबंधी टूट-फूट को कम/सीमित करने के लिए मोटर चलाने/बंद करने के दौरान गतिवर्धन/ गति को कम करना आसान होता है। वीवीवीएफ ड्राइव में सभी प्रकार की संरक्षा सहित क्लोज्ड लूप सिस्टम, एलईडी स्क्रॉलिंग डिस्प्ले सिस्टम सहित फ्लोर लेवलिंग कंट्रोल कॉल बटन, हाल बटन सहित कार ऑपरेटिंग पैनल,कम्पलीट शाफ्ट वायरिंग सहित एआरडी, अप/डाउन संकेतक और अन्य सभी संबंद्ध एसेसरीज़/उपकरण मौजूद हैं जो आईएसएसऔर आईई नियमों और आरडीएसओ विशिष्टि सं. आरडीएसओ /2013/आएम/स्पेक/0016 (रेव’ओ‘) के अनुसार मौजूदा 8 पैसेंजर, 8 स्टॉप्स और 8 ओपनिंग लिफ्ट (अधिकतम) में वीवीएफ ड्राइव सहित मौजूदा कंट्रोलर के पुनर्स्थापन के लिए अपेक्षित हैं।

      8. सौर पंपों का प्रावधान

      अमृतसर रेलवे स्टेशन के निकट समपार फाटक पर ऊर्जा संरक्षित फाइव स्टार रेटेड 1.5 एचपी सौर ऊर्जायुक्त स्टेनलेस स्टील पंप लगाए गए हैं। यह सिस्टम 2 किलोवाट शक्ति की क्षमता वाले 8 सौर फोटोवोल्टेइक मॉड्यूल, 3.5 केवीए पावर कंट्रोल यूनिट, 3 घंटे का पावर बैकअप सहित 100एएच क्षमता वाला बैटरी बैंक, से युक्त है। इससे अनुमानतः 20,000/- प्रतिवर्ष की बचत होगी।

  • विद्युत कर्षण में ऊर्जा उपयोग को बेहतर बनाने के लिए भावी पहल:

    • (i) 12000 अश्वशक्ति के विद्युत लोको के निर्माण के लिए संयुक्त उद्यम के द्वारा मधेपुरा/बिहार में विद्युत इंजन कारखाना की स्थापना:

      • 87% ऊर्जा संरक्षण
      • आईजीबीटी तकनीक के परिणामस्वरूप ये लोको भी रिजेनरेशन के कारण प्रति लोको प्रतिवर्ष 350-500 टन का कार्बन उत्सर्जन कम करेंगे।
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      (ii) 9000 अश्वशक्ति के विद्युत लोको की खरीद

      ये लोकोमोटिव पश्चिम मालभाड़ा गलियारा(डीएफसी) पर उपयोग हेतु आईजीबीटी प्रोपल्शन प्रौद्योगिकी युक्त हैं और रिजेनरेटिव ब्रेकिंग विशेषताओं सहित ऊर्जा संरक्षित हैं।

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      (iii) ट्रेन सेटों की खरीद (15 सेट 315कार; 315 कारों में से 40 आयात की जानी है और 275 भारत में तैयार की जाएंगी) :

      लोकोयुक्त गाड़ियों पर 20-30% ऊर्जा संरक्षण। (बेहतर रिजेनरेटिव ब्रेकिंग और गाड़ी विद्युत आपूर्ति की शिरोपरि उत्पादन (एचओजी) योजना, वज़न में हल्के)

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      (iv) कांचरपाड़ा, पश्चिम बंगाल में ईएमयू/एमईएमयू कोचों के निर्माण के लिए संयुक्त उद्यम के द्वारा रेल कोच फैक्ट्री की स्थापना:

      ये ईएमयू रिजेनरेशन के कारण ऊर्जा संरक्षण में सुधार करने में सहायक होंगे।

  • ऊर्जा संरक्षण क्षेत्र में विभिन्न रेलों द्वारा किए जा रहे कार्य:

    • दक्षिण मध्य रेलवे

      • 10 वर्षों से अधिक प्रयोग में लिए जा रहे अत्यधिक पुराने विंडो एयर कंडीशनर के स्थान पर बीईई 5 स्टार रेटेड स्प्लिट एयर कंडीशनरों का प्रयोग।
      • परंपरागत इवैपरेटिव साइकिल एयर कंडीशनरों के स्थान पर सौर हाइब्रिड एयर कंडीशनरों का प्रावधान। रेलवे ने विद्युत लोको शेड/काजीपेट में ऐसे 6 एयर कंडीशनर लगाएं हैं।
      • परिभ्रमण क्षेत्र और माल यार्ड में हाई मास्ट टावर लाइट में एलईडी लाइटिंग/इंडक्शन लाइटिंग लगाई गई है। 800 वाट के इंडक्शन लैंपों के स्थान पर 150वाट के मेटल हैलिडे फिटिंग और 400 वाट के इंडक्शन लैंपों के स्थान पर 80 वाट के मेटल हैलिडे लगाए गए हैं।
      • 15 मिनट में बंद होने वाले विलंब(delay) टाइमर के साथ ऑन ड्यूटी उप स्टेशन अधीक्षक के नियंत्रण में वायरलेस की-टैग कंट्रोल द्वारा रेलवे स्टेशनों पर 70% लाइट कंट्रोल सिस्टम का प्रावधान।
      • 30 मिनट में बंद होने वाले विलंब(delay) टाइमर के साथ प्लेटफॉर्म पर 70% कंट्रोल लाइटिंग के द्वारा स्टेशन परिभ्रमण क्षेत्र में हाई मास्ट लाइट का संचालन। इस योजना के अंतर्गत 16 हाई मास्ट लाइट शामिल हैं। बाकी को इस योजना के अंतर्गत शामिल किया जा रहा है।
      • रोलिंग परीक्षण लाइटों में 15 मिनट ऑफ टाइमर और रोलिंग परीक्षण लाइटों में एलईडी/इंडक्शन लैंपों का प्रावधान।
      • सभी कार्यलयों, कार्यालय भवनों, और आवासीय क्वार्टरों में पहले अधिभोग पर भी टी8/टी12 के स्थान पर टी5 एफटीएल लगाना।
      • कार्यालय परिसर तथा रेलवे स्टेशनों पर सभी वाटर कूलरों में क्लॉक टाइमर कंट्रोल का प्रावधान।
      • यात्री हाल्ट स्टेशनों पर स्टेशन लाइटिंग में एकल प्रकार के 30 मिनट ऑफ डिले टाइमर का प्रावधान।
      • रनिंग रूम और विश्रामालयों में लगे हुए इलेक्ट्रिक गीज़रों पर करंट ट्रॉंसफॉर्मर आधारित वन शॉट कट ऑफ कंट्रोल का प्रावधान।
      • महत्वपूर्ण कॉलोनियों में स्ट्रीट लाइटिंग पर डे लाइट सेंसर टाइप कंट्रोल का प्रावधान।
      • अन्य कॉलोनियों में टाइमर आधारित स्ट्रीट लाइट कंट्रोल का प्रावधान।
      • अस्पताल के वार्डों में लगे एयर कंडीशनरों के लिए डोर ऑपरेटेड लिमिट स्विच कंट्रोल का प्रावधान।


      i) ऊर्जा लेखा परीक्षा और ऊर्जा खपत बिंदुओं के लिए मानदंड विकसित करने हेतु की गई पहल

      ट्रैक्शन:

      कृष्णा कैनाल ट्रैक्शन सब स्टेशन पर ऊर्जा लेखा परीक्षा किया जा रहा है, रिपोर्ट की प्रतीक्षा है।

      नॉन-ट्रैक्शन:

      • मार्च-2015 तक 142 लोकेशनों पर ऊर्जा लेखा परीक्षा का कार्य पूरा कर लिया गया है। 2015-16 के दौरान 30 लोकेशनों को चिन्हित किया गया है जिसमें से 9 लोकेशनों पर ऊर्जा लेखा परीक्षा का कार्य पूरा कर लिया गया है, शेष दिसंबर-2015 या उससे पहले पूरा कर लिया जाएगा।
      • मानदंड निर्धारण: सर्विस भवन में लाइट पावर घनत्व(एलपीडी) पर विचार करना प्रारंभ कर दिया गया है। मंडलों को 11.8 वाट/वर्ग मीटर की एलपीडी मानदंड प्राप्त करने के निर्देश दे दिए गए हैं।
      • प्रमुख खपत वाले लोड की बेंचमार्किंग तदनुसार की जाएगी।


      ii) ट्रैक्शन और नॉन-ट्रैक्शन ऊर्जा में बचत हेतु की गई पहल

      ट्रैक्शन:

      • स्टैंडबाई ट्रांसफॉर्मर को स्विच ऑफ करके ऊर्जा संरक्षण
      • यात्रा शेड, मालभाड़ा शेड यार्डों और रास्ते में 30 मिनट से अधिक समय के लिए लोकोमोटिव को बंद करना।
      • जब भी गाड़ी 5 मिनट से अधिक समय के लिए रूकी हो तो ब्लोअर बंद कर देना।
      • थ्री फेज़ लोको के साथ संचालित ट्रेन के लिए रिजेनरेटिव ब्रेकिंग का व्यापक प्रयोग


      नॉन-ट्रैक्शन:

      • 1750 kVA एमडी के साथ 5000 kVA पावर सब-स्टेशन को पूर्णतया बंद करना और सप्ताहांत( शनिवार एवं रविवार) के दौरान 3800 kVA एमडी सब-स्टेशन के साथ अन्य 5000 kVA द्वारा रिंग मेन सर्किट के माध्यम से लोड को फीड करना।
      • “ नो लोड ” करंट को समाप्त करने के लिए प्रारंभिक स्थल से सभी स्टैंड-बाई ट्रांसफर्मरों को बंद करना।
      • ऑफ पंपिंग अवधि में केवल पंपिंग स्टेशनों को फीड करने वाले ट्रांसफर्मरों को पूर्णतया बंद करना।
      • कार्यालय अवधि के पहले एवं बाद तथा लंच के समय वातानुकूलन लोड फीडर को स्विच ऑफ करना।


      iii) ऊर्जा उपयोग को बेहतर बनाने के उद्देश्य से डिजाइन में सुधार लाने के लिए उठाए लिए कदम ः

      • पारंपरिक वाष्पीकरण वाले एयर कंडिशनरों की जगह एसपीवी हायब्रिड एयर-कंडिशनरों का उपयोग।
      • ट्रैवर्सर्स, EOT क्रेन तथा केंद्रीयकृत एयर-कंडिशनिंग के एयर हैंडलिंग यूनिटों में वीवीवीएफ ड्राइव की व्यवस्था।
      • डायनो ड्राइव परीक्षण में वीवीवीएफ ड्राइव की व्यवस्था।
      • लोकोमोटिव बैटरियों को चार्ज करने के लिए ऊर्जा-क्षम बैटरी चार्जिंग संयंत्र।
      • डीजल लोको शेड, गुंटुकल में केंद्रीयकृत अत्यधिक उच्च क्षमता वाले 160 एलपीएम के बदले वितरित कम्प्रेस्ड वायु स्रोत के रूप में 40 HP स्लिपरिंग इंडक्शन मोटर के साथ WDM2 के एक्सप्रेसर(लोको कम्प्रेसर) की व्यवस्था। यह योजना वायु परीक्षण के लिए C & W डिपो पर भी लागू की जा रही है।


      मध्य रेलवे

      गैर-कर्षण ऊर्जा खपत के अंतर्गत उठाए गए कदम

      गैर-कर्षण ऊर्जा खपत को कम करने के लिए निम्नलिखित कदम उठए जा रहे हैं।

      • उपयोगकर्ता विभागों को बिजली के उपयोग के लिए जिम्मेवार बनाना। डीआरएम द्वारा विभागीय बैठक के दौरान भी इसी की समीक्षा की जा रही है.
      • प्रमुख लोड केंद्रों पर एचटी खपत की रोजाना निगरानी करना तथा अधिक खपत को नियंत्रण करने के उपाय करना।
      • माल गोदामों एवं अन्य स्थानों के ऊंचे प्रकाश-स्तंभों को नियंत्रित करना तथा उपयोगकर्ता विभाग को जिम्मेवार बनाना।
      • एसी लोड को नॉन-एसी लोड से अलग करना और एसी लोड की निगरानी करना।
      • टी फिटिंग्स तथा सीएफएल एवं एलईडी आधारित लाइट्स की व्यवस्था।
      • विश्रामालयों एवं रनिंग रूम आदि में गीजर के उपयोग में कमी की निगरानी करना।
      • विश्रामालयों आदि में स्टोरेज प्रकार के गीजरों की बजाए तत्काल उपयोग में लाए जाने वाले गीजरों की योजना।
      • बिजली और पानी की बचत के लिए सौर ऊर्जा का उपयोग करने वाले हाइब्रिड प्रणाली से युक्त विद्युत गीजरों की व्यवस्था।
      • अधिकारियों के चैंबर में ऑक्यूपैंसी सेंसर लगवाना ताकि चैंबर की लाइट एवं एसी को नियंत्रित किया जा सके।
      • अत्यधिक उपयोग वाली जगहों पर स्टार- अंकित एसी यूनिटों एवं ऊर्जा वंचकों का उपयोग।
      • कालोनियों/सेवा उपलब्ध कराने वाले भवनों को पानी सप्लाई करने वाले पंपों के उपयोग पर नियंत्रण
      • खपत वाले महत्वपूर्ण केंद्रों पर खपत का कोटा निर्धारण करना एवं रोजाना इसकी निगरानी करना।
      • जहाँ उचित हो, अपात्रता वाली जगहों से एसी यूनिट हटाए जाएँ।
      • ऑटोमेटिक टाइमर सेटिंग के माध्यम से स्ट्रीट लाइट को नियंत्रित किया जा सकता है।
      • उपकरणों को बदलने की योजना बनाते समय, ऊर्जा-क्षम उपकरणों के इस्तेमाल की योजना बनाई जाएगी।
      • खपत कम करने के लिए सभी प्लेटफॉर्मों पर 30 % एवं 70 % की लाइट पर गंभीरता से विचार किया जाएगा।
      • कम्प्रेशर प्लांट, लाइटिंग, बिजली के चूल्हों, वायु सर्कुलेटर एवं मशीनों आदि के इस्तेमाल में कमी लाने के लिए विशेष ध्यान देते हुए कार्यशालाएं आयोजित की जाएंगी।
      • ज्यादा इस्तेमाल वाले क्षेत्र में ऊर्जा की ऑडिटिंग की जाएगी और सिफारिशें लागू की जाएंगी।
      • ऊर्जा की बचत के उद्देश्य से सौर-शक्ति/फिटिंग्स/हवा के साथ हाइब्रिड पावर एवं सौर आदि जैसे गैर-परंपरागत ऊर्जा स्रोतों के लिए और अधिक प्रस्ताव विकसित किए जाएंगे।


      उत्तर मध्य रेलवे

      गैर-कर्षण ऊर्जा खपत को कम करने के लिए उत्तर मध्य रलवेनिम्नलिखित कदम उठए गए हैं:

      • जीपीएस आधारित स्मार्ट सेंस मॉनिटरिंग सिस्टम।
      • कॉरिडोर, स्टेयरकेस, शौचालयों, बाथरूम में एल इ डी फिटिंग्स का इस्तेमाल
      • सीएफल/टी-5/एमएच/एचपीएसवी फिटिंगस की जगह सर्कुलेटिंग एरिया में स्ट्रीट लाइट
      • एचटी/एलटी सब-स्टेशनों में स्वचालित पावर फैक्टर करेक्शन पैनलों का इस्तेमाल
      • पुराने 90 वाट के सीलिंग फैन की जगह 60 वाट का फैन लगाना।
      • पारंपरिक फैन रेग्युलेटर की जगह इलेक्ट्रोनिक फैन रेग्युलेटर का इस्तेमाल
      • निओन साइनबोर्ड की जगह एलइडी आधारित स्टेशन नाम पट्ट के 6 प्रोविजन
      • यार्ड लाइटिंग/स्ट्रीट लाइटिगं के हाइ मास्ट टावरों पर टाइमर स्विच
      • एफटीएल सर्किटों एवं मेटल हेलिड सर्किटों में पारंपरिक बैलेस्ट की जगह इलेक्ट्रोनिक बैलेस्ट का इस्तेमाल
      • पंपों का ऑटोमेशन
      • पुराने अक्षम पंपों की की जगह ऊर्जा-क्षम पंपों का इस्तेमाल
      • क्वार्टर्ज के लिए कॉपर वायरिंग का इस्तेमाल
      • डीइएलपी योजना को प्रोत्साहित करना
      • 3 स्टार एवं उपरोक्त लेबल वाले इलेक्ट्रिकल उत्पाद एवं उपकरण का इस्तमाल
      • प्रमुख लोड केंद्रों की ऊर्जा ऑडिट


      पश्चिम रेलवे

      i) ऊर्जा क्षमता/संरक्षण के उपाय

      • ऊर्जा संरक्षण के उद्देश्य से टीआरडी में 0.98 की उच्च पीएफ की कमी है एवं प्रसारण एवं वितरण के नुकसान से बचने के लिए इसे बनाए रखा जाता है।उच्च पीफ को बनाए रखने के लिए, पश्चिम रेलवे को लगभग 2.32 करोड़ रु./माह का प्रोत्साहन/छूट दी जा रही है।
      • ट्रैक्शन सब-स्टेशन पर, स्टैंड-बाई ट्राँसफरमर को स्विच ऑफ रखा जाता है, ताकि कोई लोड नहीं होने के समय नुकसान से बचा जा सके।
      • ओएचई वोल्टेज को सीमा के अंतर्गत रखा जाता है और निम्न कैटनरी वोल्टेज से बचा जाता है। इस प्रकार, निम्न वोल्टेज के कारण उत्पन्न उच्च करंट की वजह से होने वाले नुकसान से बचा जाता है।

      पश्चिम रेलवे की वर्ष-वार खपत एवं एसइसी (गैर-कर्षण) निम्नानुसार हैः

      वर्ष गैर-कर्षण लक्ष्य एसईसी (KWH/KW)
      2010-11 1220.02 70.45
      2011-12 1157.34 70.08
      2012-13 1112.98 65.50
      2013-14 1111.81 63.32
      2014-15 1101.10 61.56

      पश्चिम रेलवे पर यह उपलब्धि स्टेशनों पर सौर शक्ति प्रणालियों, एलसी गेट्स, कालोनियों, स्टेशनों पर सोलर स्ट्रीट लाइट्स, इसके अलावा स्टेशनों पर एलइडी फिटिंग्स का प्रावधान, ऊर्जा-क्षम लाइट फिटिंगस का प्रावधान, पंपों का ऑटोमेशन, स्टार रेटिड उपकरणों का प्रावधान, सिगनलिंग सिस्टम आदि के माध्यम से 70 % लाइटिंग सर्किट्स का ऑटोमेशन जैसी कई हरित ऊर्जा पहलों के माध्यम से हासिल की गई है।

      कर्षण ऊर्जा की खपत गाड़ियों की ढुलाई में होती है। विद्युत इंजिन के लिए ऊर्जा संरक्षण उपायों की पहचान करके कार्य योजना तैयार की गई है। कार्य योजना के मुख्य अंश निम्नलिखित हैं-

      रनिंग स्टाफ

      • सीसी+8+2 लदान सहित फॉयस लोड लेकर मंडल द्वारा जीटीकेएम का सही लेखा-जोखा।
      • किनारे लगे हुए बोर्डों के स्थलों की पहचान करना और कोस्टिंग बोर्डों का प्रावधान।
      • ऱाशन लोडवार और सेक्शनवार भार सहित ट्रिप का निर्धारण और अकुशल ड्राइवरों की निगरानी तथा परामर्श।
      • जब एकल इंजिन लदान/एलई का कार्य हो रहा हो, एमयू और ट्रिपलर में ट्रेलिंग लोको को स्विच ऑफ रखना।
      • 15 मिनट से अधिक डिटेंशन के लिए स्टेबलिंग यार्ड , ट्रिप शेड,लोको शेड में सहायक मशीनों को स्विच ऑफ रखना।
      • जब किसी भी यार्ड में ( सिंगल,एमयू,ट्रिपलर) लूप,ट्रिप शेड,लोको शेड में यदि 45 मिनट से अधिक का डिटेंशन होता है तो इंजन बंद रखें।
      • लोको पाइलट द्वारा डीबीआर एवं रिजेनरेटिव ब्रेकिंग का 100 प्रयोग।


      परिचालनिक कर्मचारी

      • सिगनलों का समय से बंद किया जाना सुनिश्चित करें।
      • धीमी गति से चलने वाली गाड़ियों मेल /एक्सप्रेस एवं पैसेंजर ट्रेन को प्राथमिकता देने के लिए उच्च गति की मालगाड़ियों जैसे सीओएनआरएजे(CONRAJ) को नियंत्रित न करें।
      • कर्मीदल को गाड़ी नियंत्रण/ स्टेशन/यार्ड में डिटेंशन के बारे में सूचित करें जिससे कर्मीदल ब्लोअर्स/इंजिनों को स्थित्यानुसार बंद कर सकें।
      • इंजिनों के एकल परिचालन से बचें।
      • 3 फेज़ लोको में रिजेनरेशन इष्टतम उपयोग के लिए अधिकतम संभव कोस्टिंग द्वारा ऊर्जा संरक्षण और रिजेनरेटिव ब्रेकिंग का कुशलतापूर्वक प्रयोग।


      iii) ऊर्जा लेखा परीक्षा के लिए की गई पहल

      पश्चिम रेलवे पर ऊर्जा लेखा परीक्षा करने के लिए 2010 के बीईई के नियम के अनुसार जारी किए गए दिशानिर्देशों का पालन किया जाता है।

      पश्चिम रेलवे के निम्नलिखित स्थलों पर पहले ही ऊर्जा लेखा परीक्षा की जा चुकी है और उसकी संस्तुतियों को पहले ही लागू किया जा चुका है।

      क्रम सं कार्यक्षेत्रों का विवरण चिन्हित किए गए वर्क सेंटर लेखा परीक्षा का वर्ष के द्वारा लेखा परीक्षा किया गया
      1 चर्चगेट रेलवे स्टेशन और जेआरएच 2 nos. 2009-10 मेसर्स एन्कॉन एनर्जी मैनेजमेंट सर्विसेज़,औरंगाबाद
      2 वड़ोदरा स्टेशन और एनएआईआर कॉम्प्लेक्स 2 nos. 2009-10 मेसर्स एन्कॉन एनर्जी मैनेजमेंट सर्विसेज़,औरंगाबाद
      3 रतलाम मंडल में पंपिंग इंस्टालेशन 9 nos. 2009-10 श्री विवेक दीक्षित, ऊर्जा लेखा परीक्षक के रूप में वरि.मं.वि. इंजी.(पी) रतलाम द्वारा विभागीय स्तर पर
      4 सवारी मालडिब्बा कारखाना/दाहोद 1 nos. 2008-09 मेसर्स तुवसुद,दक्षिण एशिया नई दिल्ली
      5 रेलवे कॉलोनी,दाहोद 1 nos. 2009-10 मेसर्स ईआरडीए
      6 कैरिज वर्कशॉप, लोअर परेल 1 nos. 2012-13 मेसर्स सौरभ इंजी..
      7 मकरपुरा टीएसएस 1 nos. 2007-08 मेसर्स ईआरडीए
      8 भेस्टान टीएसएस 1 nos. 2007-08 श्री संजय सागर, ऊर्जा लेखा परीक्षक के रूप में वरि.मं. वि. इंजी./टीआरडी/मुख्यालय द्वारा विभागीय स्तर पर
      9 महालक्ष्मी कारखाना 1 no. 2007-08 मेसर्स साकेत प्रोजेक्ट्स/अहमदाबाद
      10 वटवा, डीजलशेड 1 no. 2015-16 श्री ललित तोमर/मं.वि.इंजी.कोचिंग/अहमदाबाद द्वारा विभागीय तौर पर
      11 मंरेप्र कार्यालय, मंडल चिकित्सालय, पंपिंग इंस्टॉलेशन, भावनगर पारा 3 nos. 2015-16 मेसर्स दर्शन इंस्टीट्यूट ऑफ इंजी. एंड टेक्नॉलॉजी/राजकोट

      पश्चिम रेलवे पर ऊर्जा लेखा परीक्षा के लिए 25 स्थलों को चिन्हित कर लिया गया है।

      क्रम सं स्थान टिप्पणी
      1 महाप्रबंधक का कार्यालय(ओल्ड बिल्डिंग) प्रस्ताव प्रक्रियाधीन है। टीडीसी 31.12.2015
      2 मंडल रेल प्रबंधक कार्यालय,मुंबई सेंट्रल
      3 मुंबई सेंट्रल स्टेशन
      4 बांद्रा टर्मिनस स्टेशन
      5 जगजीवन राम अस्पताल
      6 लोअर परेल कारखाना
      7 एमईएमयू शेड,वड़ोदरा
      8 प्रतापनगर कारखाना
      9 मंडल रेल प्रबंधक, रतलाम
      10 मंडल चिकित्सालय,रतलाम
      11 इंदौर स्टेशन
      12 डीजल शेड, रतलाम
      13 मंरेप्र कार्यालय, अहमदाबाद
      14 मंडल चिकित्सालय, साबरमती
      15 अहमदाबाद स्टेशन
      16 मेहसाणा स्टेशन
      17 डीजल शेड, वटवा मई-2015 में ऊर्जा लेखा परीक्षा पूरा कर लिया गया। अनुशंसाओं को क्रियान्वित किया जा रहा है।
      18 मंरेप्र कार्यालय, राजकोट प्रस्ताव प्रक्रियाधीन। टीडीसी 31.12.2015
      19 मंडल चिकित्सालय, राजकोट
      20 राजकोट स्टेशन
      21 हापा यार्ड
      22 मंडल चिकित्सालय, भावनगर ऊर्जा लेखा परीक्षा अगस्त-2015 में पूरी की गई। अनुशंसाओं का अध्धयन किया जा रहा है।
      23 महालक्ष्मी कारखाना प्रस्ताव प्रक्रियाधीन है। टीडीसी 31.12.2015
      24 लेडी जैक्सन चिकित्सालय,दाहोद.
      25 ईएमयू कारशेड,मुंबई सेंट्रल,कांदीवली,विरार
      शेड/ कारखाना बड़ौदा बीएल दाहोद
      ऊर्जा लेखा परीक्षा नवंबर 2012 जुलाई 2013 जून – 2008
      ISO 50001 व.मं.वि.इंजी./पी द्वारा किया जा रहा है। निविदा 06.10.15 को देय है। प्राप्त की गई विस्तृत प्राक्कलन की विधीक्षा की गई निविदा आमंत्रित की जा रही है।

      कर्षण सबस्टेशनों की ऊर्जा लेखापरीक्षा:

      वर्ष-2007 में मेसर्स ईआरडीए द्वारा एमपीआर टीएसएस की ऊर्जा लेखा परीक्षा की गई। मेसर्स ईआरडीए की संस्तुतियों के अनुसार, पावर फैक्टर को 0.98 और उससे ऊपर तक बेहतर बनाने के लिए अतिरिक्त कैपेसिटर बैंक की व्यवस्था की गई है। इससे रेलवे का पावर फैक्टर इंसेंटिव 58.71 लाख रू. प्रति वर्ष रहा ।

      इसी प्रकार, भेस्टान टीएसएस का र्जा लेखा परीक्षा भी वर्ष 2007 में उपमुख्य.वि.इंजी./टीआरडी/सीसीजी( ऊर्जा लेखा परीक्षक) किया गया और संसतुतियों को क्रियान्वित भी किया गया तथा 40 लाख रू. की प्रतिवर्ष बचत की गई क्योंकि पीएफ इंसेंटिव रेलवे द्वारा प्राप्त किया जा रहा है।

      ऊर्जा संरक्षण सुनिश्चित करने के लिए रेलवे अपने सभी टीएसएस में हर तरह की कार्रवाई कर रहा है। हालांकि, बीईई –ऊर्जा संरक्षण ब्यूरो की महत्वपूर्ण आवश्यकता के सारांश के अनुसार- ईडी(ईएम)-ऊर्जा लेखा परीक्षा विनियम-2010 के संचलन हेतु समय और अंतराल, चर्चा के दौरान महानिदेशक/बीईई को बता दिए गए हैं कि ट्रैक्शन सबस्टेशन की लेखा परीक्षा आवश्यक नहीं है।

      इसे देखते हुए किसी टीएसएस की कोई लेखा परीक्षा अब नहीं की जा रही है।

      भवनों का आईएसओ 50001 और संस्थापन:

      भारतीय रेल में पहली बार– राजकोट, मुंबई सेंट्रल, भावनगर पारा, अहमदाबाद, विद्युत लोकोशेड, वलसाड और एसटी स्टेशन के मंडल रेल प्रबंधक कार्यालयों के लिए ऊर्जा प्रबंधन प्रणाली के लिए आईएसओ 50001 प्राप्त किया गया है। 20 अन्य लोकेशनों के लिए आईएसओ 50001 प्राप्त करने के लिए प्रस्ताव पाइपलाइन में हैं(विचाराधीन हैं)

      iv) सीएमएस के माध्यम से थ्री फेज़ विद्युत लोकोमोटिव पर ऊर्जा उत्पादन की कर्षण और गैर-कर्षण ऊर्जा मॉनीटरिंग में बचत के लिए की जाने वाली पहल।

      प्रौद्योगिक उन्नति और कुशल स्विचिंग उपकरणों की उपलब्धता के साथ,रिजेनरेटिव ब्रेकिंग 3 फेज़ जीटीओ लोको के साथ डिजाइन में आ गया है। सीएमएस के माध्यम से साइनिंग ऑफ के समय ऊर्जा और ट्रेन लोड रीडिंग की एंट्री के लिए सभी लोको पाइलट/सहायक लोको पाइलटों को परामर्श देने हेतु 15 अगस्त को एक हफ्ते का अभियान चलाया गया । इन आकंडों का विश्लेषण किया जा रहा है ताकि किसी खास सेक्शन में और लदानवार मानदंड सुनिश्चित किया जा सके। अभियान के दौरान लोको पाइलटों को 3 फेज़ लोको में रिजेनरेशन को बेहतर बनाने के लिए रिजेनरेटिव ब्रेकिंग के कुशल प्रयोग और कोस्टिंग के दौरान ऊर्जा संरक्षण हेतु प्रोत्साहित और अभिप्रेरित किया गया।

      पश्चिम रेलवे पर कई तरह की हरित क्रांति पहल के माध्यम से गैर-कर्षण में बचत की गई, जैसे- स्टेशनों पर सौर शक्ति प्रणालियों का प्रावधान, समपार फाटक, स्टेशनों, कॉलोनियों में सौर स्ट्रीट लाइटों का प्रावधान, पारंपरिक ऊर्जा संरक्षण उपायों जैसे- स्टेशनों पर एलईडी फिटिंग्स का प्रावधान, ऊर्जा संरक्षित लाइट फिटिंग्स का प्रावधान, पंपों का ऑटोमेशन, स्टार रेटेड उपकरणों का प्रावधान, सिग्नलिंग सिस्टम के द्वारा प्लेटफॉर्मों पर 70% लाइटिंग सर्किट के ऑटोमेशन आदि।

      v) ऊर्जा उपयोग में सुधार लाने के लिए डिजाइन को बेहतर बनाने के लिए की गई पहल

      1. मुंबई उपनगरीय सेक्शन में 1500 वाट डी.सी को 25 केवी एसी सिस्टम में कई चरणों में किया गया जो कि उपनगरीय यातायात और मौजूदा पुराने पुलों के नीचे ओएचई क्लियरेंस को देखते हुए लगभग असंभव कार्य था। 1500 वाट डी.सी को 25 केवी एसी सिस्टम के कन्वर्जन का कार्य दिनांक 05.02.2012 को पूरा कर लिया गया।

      25 केवी एसी के साथ, सिस्टम में ऊर्जा ह्रास में काफी कमी आई है और ईएमयू और लोको में 3 फेज़ तकनीक सहित जेनरेशन संभव हुआ है। 2013-14 से ईएमयू द्वारा खपत की गई ऊर्जा का लगभग 30% रिजेनरेशन द्वारा सिस्टम में फीडबैक दिया गया है। इसके परिणामस्वरूप वर्ष 2014-15 में 82.56 एमयू ऊर्जा की बचत की गई जिसकी कीमत सगभग 65.39 रू. है।

      2. सिस्टम में नुकसान को कम करने के लिए अन्य पहल:

      • ओलीवर-जी उपस्कर द्वारा आवधिक करंट कलेक्शन जांच की जा रही है और दुष्कर खराबियों को तत्काल दूर किया जा रहा है जिससे ओएचई और पैंटो पैन के बीच कोई चिंगारी न निकले।
      • ओएचई में हॉट स्पॉट का पता लगाने और उसे समय पर ठीक करने के लिए के लिए रूफ माउंटेड थर्मल इमेजिंग कैमरा द्वारा ओएचई की जांच करना जिससे न केवल संभाव्य खराबियों से बचा जा सके बल्कि ऊर्जा हानि को भी रोका जा सके। उपस्कर अत्यधिक गर्म हो जाने की घटना से बचने के लिए स्विचिंग स्टेसनों और कर्षण उपकेंद्रों में भी इसी प्रकार जांचें की जा रही है।
      • पहले उप सेक्टर में फीडिंग छोर से आइसोलेटरों पर 105 वर्ग मिमी जंपरों से बदला जा रहा है।
      • 1250 एम्पियर क्षमता वाले आइसोलेटरों के स्थान पर 1600 एंपियर क्षमता वाले आइसोलेटरों की व्यवस्था की जा रही है।


      3. सिग्नलिंग सिस्टम द्वारा प्लेटफॉर्म पर 70% लाइटिंग सर्किट का ऑटोमेशन

      vi) & xi) ट्रैक्शन और गैर-कर्षण क्षेत्रों में एसईसी में सुधार

      कर्षण क्षेत्र में सुधार

      एसईसी लक्ष्य 2015-16 माह के दौरान उपलब्धियां (जुलाई) वर्ष के दौरान संचयी (अप्रैल-जुलाई) % सुधार(संचयी)
      2014-15 2015-16 2014-15 2015-16
      माल 6.21 6.79 7.86 6.33 7.50 - 18.48
      यात्री 19.70 19.67 19.73 19.65 19.70 - 0.25

      गैर-कर्षण क्षेत्र में सुधार

      पश्चिम रेलवे की वर्षवार खपत और एसईसी(गैर-कर्षण) निम्नलिखित है:

      वर्ष गैर-कर्षण प्रयोजन एसईसी (किलोवाटघं/किलोवाट)
      2010-11 1220.02 70.45
      2011-12 1157.34 70.08
      2012-13 1112.98 65.50
      2013-14 1111.81 63.32
      2014-15 1101.10 61.56

      (vii) मांग पक्ष प्रबंधन/भवन प्रबंधन प्रणाली

      (क) प्रत्येक कर्षण सबस्टेशन की संविदा मांग प्रति लोड पैटर्न के अनुकूल रखी जाती है जिससे डीआईएससीओएम को कोई दंड प्रभार न देना पड़े। इसके लिए, मंडल द्वारा संविदा मांग की अर्धवार्षिक समीक्षा की जाती है और तदनुसार प्रधान कार्यालय द्वारा अनुमोदन दिया जाता है।

      (ख) पश्चिम रेलवे के निम्नलिखित भवनों को बीईई द्वारा स्टार रेटिंग की गई है।:

      • मुंबई सेंट्रल का मं.रे.प्र. कार्यालय – 5 स्टार रेटिंग
      • वड़ोदरा का मं.रे.प्र. कार्यालय- 5 स्टार रेटिंग
      • रतलाम का मं.रे.प्र.कार्यालय-5 स्टार रेटिंग
      • अहमदाबाद का मं.रे.प्र.कार्यालय-5 स्टार रेटिंग
      • राजकोट का मं.रे.प्र. कार्यालय-5 स्टार रेटिंग
      • भावनगर का मं.रे.प्र.कार्यालय-3 स्टार रेटिंग


      (ग) भारतीय रेल पर पहली बार मंडल रेल प्रबंधक कार्यालय/राजकोट , मंडल रेल प्रबंधक कार्यालय/भावनगर, मंडल रेल प्रबंधक कार्यालय – भावनगर पारा, मंडल रेल प्रबंधक/अहमदाबाद, विद्युत लोको शेड-बीएल और एसटी स्टेशन के लिए से ऊर्जा प्रबंधन प्रणाली के लिए आईएसओ प्राप्त कर लिया गया है। 20 अन्य लोकेशनों के लिए आईएसओ 50001 प्राप्त करने का प्रस्ताव प्रक्रियाधीन है।

      viii) विद्युत लोको/ड्राइविंग तकनीक में ऊर्जा संरक्षण

      खपत की गई ऊर्जा और रिजेनरेशन डेटा सीएमएस में एलपी द्वारा फीड किए गए हैं। किसी खास सेक्शन में और लदानवार मानदंड सुनिश्चित करने के लिए इन डेटा का विश्लेषण किया जा रहा है। ऐसे अकुशल ड्राइवरों ,जिनका रिजेनरेशन कम है और ऊर्जा खपत ज्यादा है ,उनमें सुधार हेतु नियमित काउंसलिंग की जा रही है।

      xi) सामान्य पावर आपूर्ति में ऊर्जा संरक्षण.

      उपरोक्त के अनुसार

      x) रेलवे कोचों पर सौर पैनल

      साइंस एक्सप्रेस के 2 कोचों पर सौर पैनल लगाए गए हैं

      xii) 3 फेज़ लोकोमोटिव में रिजेनरेटिव ब्रेकिंग के कारण बचत:

      विद्युत लोकोमोटिव के लिए 3 फेज़ तकनीक अपनाने के कारण ऊर्जा खपत में विशेष सुधार हुआ है जिसने ऊर्जा खपत का 15 से 17% रिजेनरेशन आसान कर दिया है। वर्तमान में, औसतन 42 3-फेज़ लोको प्रति दिन अर्थात् कुल कटौती समय का 22% पश्चिम रेलवे पर गाड़ी परिचालन के लिए उपलब्ध है।जेडईटीसी/बड़ौदा पर सिमुलेटर का प्रयोग करते हुए ड्राइविंग तकनीक को सुधारने के लिए नियमित रूप से ड्राइवरों की काउंसलिंग की जा रही है। अप्रैल-15 से जुलाई-15 के दौरान अनुमानतः 6.71 मिलियन यूनिट रिजेनरेट की गई जिसके परिणामस्वरूप लगभग 4.90 करोड़ की बचत की गई।

      xiii) स्टार रेटेड उपकरणों का प्रयोग

      पश्चिम रेलवे पर स्टार रेटेड उपकरण जैसे- ऊर्जा सक्षम सबमर्सिबल पंप,सीलिंग फैन,एयर कंडीशनर,रेफ्रिजरेटर, आदि की व्यवस्था की जा रही है।पश्चिम रेलवे पर पिछले 5 वर्षों में खरीदे गए उपकरणों का विवरण निम्नलिखित है:

      वर्ष स्टार रेटेड उपकरण
      2010-11 564
      2011-12 733
      2012-13 742
      2013-14 896
      2014-15 733

      xiv) रेल परिसर में एलईडी का प्रयोग

      • भारतीय रेल में पहली बार सीएसआर पहल के अंतर्गत मेसर्स सिस्का एलईडी द्वारा पूरे मुंबई सेंट्रल स्टेशन पर एलईडी लाइटों का प्रावधान किया गया है।
      • पश्चिम रेलवे के अन्य 8 स्टेशनों पर (बिलीमोरा, कोठाज, ओड, मकरपुरा,बमामा, बरजथी, साबरमती एवं पालनपुर) एलईडी लाइटिंग की व्यवस्था की गई।
      • पश्चिम रेलवे पर 6538 सं. को बदले जाने हेतु आइडेंटिफाई किया गया है। अब तक निम्नलिखित को बदला जा चुका है:
      • मुंबई सेंट्रल मंडल में 820
      • बड़ौदा मंडल में 106
      • अहमदाबाद मंडल में 37


      xv) डीईएलपी योजना के अंतर्गत खरीदे गए एलईडी लैंपों की स्थिति

      विद्युत मंत्रालय के सार्वजनिक उपक्रम के संयुक्त उद्यम से विद्युत मंत्रालय,मेसर्स एनर्जी एफिशिएंसी सर्विस लिमिटेड(ईईएसएल) के जरिए घरेलू संरक्षण लाइटिंग कार्यक्रम (डीईएलपी) योजना के अंतर्गत लोगों को 7 वाट के ऊर्जा संरक्षित एलईडी बल्ब के वितरण की सुविधा मुहैया करा रहा है और यह लाभ रेल कर्मचारियों को को देने के लिए इसकी कीमत केवल 100/- रखी गई है (जबकि इसी बव्ब की बाजार में कीमक 250-300 रू. है) ईईएसएल वैध पहचान पत्र रखने वाले प्रत्येक कर्मचारी को 10 एलईडी बव्ब 100/- की कीमत के हिसाब से देगा।

      महाप्रबंधक/पश्चिम रेलवे द्वारा दिनांक 11.09.2015 को पश्चिम रेलवे पर इस योजना का शुभारंभ किया गया। पश्चिम रेलवे पर अब तक 15251 एलईडी बल्ब वितरित किए जा चुके हैं।

      मद सं. xvi) डीसी/एसी कन्वर्जन

      मुंबई उपनगरीय सेक्शन में 1500 वाट डी.सी को 25 केवी एसी सिस्टम में कई चरणों में किया गया जो कि उपनगरीय यातायात और मौजूदा पुराने पुलों के नीचे ओएचई क्लियरेंस को देखते हुए लगभग असंभव कार्य था। 1500 वाट डी.सी को 25 केवी एसी सिस्टम के कन्वर्जन का कार्य दिनांक 05.02.2012 को पूरा कर लिया गया।

      उत्तर पश्चिम रेलवे

      • जयपुर मंडल में यूएनडीपी परियोजना के अंतर्गत जीएसएम/जीपीआरस के माध्यम से पंपिंग इंस्टालेशन का ऑटोमेशन और रिमोट कंट्रोल।
      • 90/60 वाट के सीलिंग फैन के स्थान पर 30 वाट के सीलिंग फैन का प्रयोग।
      • टी-5/टी8इफएल ट्यूब के स्थान पर एलईडी लाइटों का प्रयोग
      • कोचों में ऊर्जा संरक्षिक एलईडी प्रकाशपंजों का प्रयोग।
      • 40 वाट के पारंपरिक प्रकार के लैंप के स्थान पर 5 वाट के एलईडी आधारित टेल लैंप का प्रयोग
      • 15 वाट के पारंपरिक प्रकार के लैंप के स्थान पर एलईडी आधारित लाइट लाइट –सह- बर्थ संकेतक लाइटों का प्रयोग।
      • 18 वाट के फ्लोरेसेंट ट्यूब लाइटों के स्थान पर 11 वाट के सीएफएल फिटिंग्स का प्रयोग।
      • वातानुकूलित ईओजी कोचों में ईंधन खपत के लिए कैपेसिटर बैंक लगाए जा रहै हैं।
      • ई-बीम कोच वायरिंग के लिए केबल के प्रयोग किया जा रहा है।
      • रिजेनरेटिव प्रकार की बैट्री चार्जर, डाइना ड्राइव मशीन , आल्टीमेटर और आरआरयू/ईआरआरयू टेस्टिंग बेंच कारखानों और कोचिंग डिपो में इंस्टाल कर दी गई है।
      • सिक लाइन में पावर कार के बिना ईओजी कोचों की टेस्टिंग के लिए जयपुर,बीकानेर और जोधपुर में टेस्टिंग गैजेट लगा दिए गए हैं।
      a

      अजमेर रेलवे स्टेशन (उत्तर पश्चिमी रेलवे) में एलईडी लाइट्स के साथ उच्च मास्ट प्रकाश टावर्स